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फेडरल रिजर्व के कदम से क्यों घबराये दुनिया के बाजार : सिद्धार्थ चौधरी से बातचीत

फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) ने फिर से अपनी ब्याज दरों में 0.25% की कटौती जरूर कर दी है, पर आगे के लिए उसके बोल कड़े हैं (hawkish tone)। इसके बाद से दुनिया भर में चाहे बॉन्ड बाजारों के यील्ड हों या शेयर बाजार हों, सब जगह भारी उथल-पुथल मची है।

Stock Market Analysis : बाजार में अब निवेशक क्या बनायें रणनीति?

Expert Vijay Chopra: डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी हमारे लिए अच्छी नहीं है। हम कई चीजों के लिए आयात पर निर्भर हैं, इसलिए डॉलर महँगा होने से आयात प्रभावित होगा। हालाँकि कच्चा तेल इस समय महँगा नहीं है और ये हमारे लिए बहुत अच्छी बात है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय कारणों में अमेरिका में नव निर्वाचित राष्ट्रपति का कार्यभार संभालने को नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं।

Gillette India Ltd Share Latest News: कोई मजबूरी न हो, तो स्टॉक को होल्ड करें

गजेंद्र मौर्या : जिलेट इंडिया पर आपके क्या विचार हैं? इसे 6000 रुपये के स्तर से होल्ड किया है।

Sterling and Wilson Renewable Energy Ltd Share Latest News: घबरायें नहीं, लंबी अवधि में देगा फायदा

अजय शर्मा : मैंने एस डब्लू सोलर के 90 शेयर 513 रुपये के भाव पर खरीदे हैं। इस पर आपकी क्या राय है?

IDFC First Bank Ltd Share Latest News: स्टॉक में गिरावट की आशंका कम, आ सकती है रिकवरी

ओम प्रकाश : मैंने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के 3000 शेयर 84 रुपये के भाव पर खरीदे हैं। एक साल से ज्यादा समय हो गया है, इसमें काफी नुकसान हो रहा है। इसमें क्या करें?

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कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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