कमोडिटी बाजार में हाल के दिनों में सोना और चाँदी में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।पहले इन दोनों की कीमतों में इतनी तेजी आयी कि लोगों को समझ नहीं आ रहा था कि यह रैली कहाँ जाकर रुकेगी।
कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता का कहना है कि अचानक कुछ ही दिनों में भारी गिरावट आ गयी, जिससे निवेशकों में डर का माहौल बन गया। अब कीमतों में थोड़ी स्थिरता नजर आ रही है, लेकिन अनुज गुप्ता का मानना है कि यह स्थिरता स्थायी नहीं है और फिलहाल बाजार रेंज में ही घूमता रहेगा। सोना और चांदी में जो तेजी देखने को मिली थी, उसका बड़ा कारण “FOMO” यानी छूट जाने का डर था। लोग तेजी देखकर हर भाव पर खरीदारी करने लगे थे। मार्जिन बढ़ने, मुनाफावसूली और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के कारण जब गिरावट आई तो वही लोग घबरा गए। इस गिरावट ने बाजार को एक तरह का रियलिटी चेक दिया है। अब वह पागलपन वाली तेजी जल्दी लौटती नहीं दिख रही और बाजार ज्यादा संतुलित नजर आ रहा है।
अभी सोने और चाँदी में शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग तो की जा सकती है, लेकिन जल्दी बड़ा मुनाफा कमाने की उम्मीद रखना गलत होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ हफ्तों तक ये दोनों धातुएं एक सीमित दायरे में ही ऊपर-नीचे होंगी। चांदी में मोटे तौर पर 2.20 लाख से 2.80 लाख रुपये और सोने में 1.40 लाख से 1.65 लाख रुपये के बीच का दायरा देखा जा सकता है। ऐसे में बीच के स्तरों पर खरीदारी करने वालों के लिए रिस्क ज्यादा है, बेहतर है कि नीचे के स्तरों का इंतजार किया जाये।
जो लोग फिजिकल गोल्ड या सिल्वर खरीदना चाहते हैं, उनके लिए सलाह है कि वे बहुत छोटे समय के फायदे की उम्मीद न रखें। अगर 6 से 8 महीने या उससे ज्यादा का नजरिया है तो इस भाव पर भी धीरे-धीरे खरीदारी की जा सकती है। थोड़ा-थोड़ा करके खरीदना और भाव नीचे आने पर औसत करना एक समझदारी भरी रणनीति हो सकती है। शादी-ब्याह या लंबे समय के लिए सोना लेने वालों के लिए मौजूदा स्तर बहुत महंगे नहीं माने जा रहे हैं, लेकिन जल्द ही फिर से बड़ी उछाल की उम्मीद करना सही नहीं होगा।
जनवरी में फिजिकल मार्केट, ईटीएफ और एमसीएक्स की कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिला था। फोमो के चलते ज्वैलर्स ऊंचे भाव पर माल बेचने से बच रहे थे और खरीदने वालों को प्रीमियम देना पड़ रहा था। अब जब बाजार थोड़ा शांत हुआ है, तो यह अंतर कम होता नजर आ रहा है। आगे चलकर उम्मीद है कि फिजिकल गोल्ड, ईटीएफ और फ्यूचर्स के भावों में बेहतर तालमेल देखने को मिलेगा और आम निवेशक को सही रेट मिलने में दिक्कत कम होगी।
रुपये और कच्चे तेल की चाल भी बाजार पर असर डाल रही है। ट्रेड डील और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के कारण रुपया मजबूत हुआ है। इससे भारत की अर्थव्यवस्था को सपोर्ट मिलता दिख रहा है। तेल के दाम भी फिलहाल एक सीमित दायरे में रह सकते हैं, जिससे महंगाई पर दबाव कम रहने की उम्मीद है।
कमोडिटी बाजार अभी रेंज में फंसा हुआ है और अचानक बड़े मूवमेंट की संभावना कम है। निवेशकों के लिए सबसे बड़ी सीख यही है कि सोना-चांदी को बिल्कुल सुरक्षित और बिना जोखिम वाला निवेश मानना गलत है। इनमें भी तेज़ उतार-चढ़ाव हो सकता है। हर बार सबसे नीचे खरीदना और सबसे ऊपर बेचना संभव नहीं होता। इसलिए जल्दबाजी में बड़े दांव लगाने के बजाय सोच-समझकर, छोटी मात्रा में और सही रणनीति के साथ निवेश या ट्रेडिंग करना ही समझदारी है।
(शेयर मंथन, 03 फरवरी 2026)
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