शेयर मंथन में खोजें

सोना-चांदी रिकॉर्ड ऊँचाई पर, बढ़ती तेजी जोखिम है या खतरा?

सोने और चाँदी की मौजूदा चाल को लेकर बाजार में जितनी तेजी दिख रही है, उतना ही बड़ा जोखिम भी छिपा हुआ है।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार कहते है कि सोना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगभग 5000 डॉलर और घरेलू बाजार में 1,60,000 रुपये के आसपास पहुंच चुका है। यह वही स्तर है, जिसे पहले 2030 तक का साइकिल टारगेट माना जा रहा था, लेकिन वह लक्ष्य 2026 में ही पूरा हो गया। ऐसे में थ्योरिटिकली यह स्थिति बेहद जोखिम भरी है। समस्या यह है कि तेजी थमने का नाम नहीं ले रही, न कोई ठोस रिट्रेसमेंट मिल रहा है और न ही ऐसा कोई स्तर दिख रहा है जहां आराम से खरीद या मुनाफावसूली की जा सके।

इस तेजी के पीछे जो ड्राइवर्स हैं, वे फिलहाल किसी के कंट्रोल में नहीं हैं। जियोपॉलिटिकल तनाव, अमेरिका की नीतियां, ईरान-वेनेजुएला जैसे मुद्दे और चीन समेत कई सेंट्रल बैंकों की लगातार गोल्ड खरीदारी—इन सबने मिलकर गोल्ड को सपोर्ट दिया है। रिजर्व करेंसी के विकल्प के तौर पर गोल्ड के अलावा फिलहाल कुछ ठोस नजर नहीं आता, इसी वजह से सेंट्रल बैंक इसे छोड़ नहीं रहे। लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि जोखिम खत्म हो गया है। अगर गोल्ड को इक्विटी की तरह देखा जाए, तो इतनी ऊंचाई पर कोई भी इक्विटी लंबे समय तक बिना करेक्शन के टिक नहीं पाती।

ऐसे माहौल में जिन निवेशकों के पास पहले से सोना या चाँदी है, उनके लिए फैसला लेना मुश्किल है। बाहर से देखने वालों के लिए इस तेजी में कूदना और भी ज्यादा जोखिम भरा हो जाता है। एकमात्र व्यावहारिक तरीका 8–10% का ट्रेलिंग रिस्क रूल हो सकता है, यानी अगर ट्रेंड चलता रहे तो उसे राइड किया जाए, लेकिन जैसे ही मोमेंटम टूटे, बाहर निकलने की तैयारी रहे। इसके बावजूद यह बात ध्यान में रखनी जरूरी है कि थ्योरिटिकली रिस्क बहुत ज्यादा है।

चाँदी की बात करें तो वहां भी तस्वीर कुछ अलग नहीं है। डॉलर में चांदी 100 के ऊपर निकल चुकी है और पहले का टारगेट 85 डॉलर के आसपास था। मौजूदा कैलकुलेशन के हिसाब से ऊपर का टेक्निकल टारगेट लगभग 125 डॉलर तक बनता है, उससे आगे नहीं। रुपये में देखें तो MCX पर यह स्तर करीब 4 लाख रुपये के आसपास बैठता है। चांदी में 20–25% की तेजी किसी भी दिन ट्रेड के दम पर आ सकती है, लेकिन जोखिम यहां भी उतना ही बड़ा है। रणनीति साफ है। अगर समझ नहीं आ रहा कि क्यों खरीदना है, तो दूर रहना ही बेहतर है।

एसेट एलोकेशन के नजरिए से देखें तो जिन निवेशकों ने अपने पोर्टफोलियो में 5-7% सोना-चांदी रखने का नियम बनाया था, उनके लिए थोड़ी ओवरवेट पोजिशन कोई बड़ी समस्या नहीं है। भारत में ज्यादातर घरों में किसी न किसी रूप में पहले से ही सोना मौजूद रहता है। लेकिन जिन्होंने जानबूझकर 15% या उससे ज्यादा का एलोकेशन रखा था और वह अब 25-30% तक पहुंच गया है, उनके लिए री-बैलेंसिंग जरूरी है। ऐसे मामलों में पुराने तय स्तर पर वापस आना समझदारी भरा कदम माना जाएगा।

आखिर में यही कहा जा सकता है कि सोना और चांदी इस समय एक्सट्रीम रिस्क ज़ोन में हैं। तेजी चाहे जितनी भी आकर्षक लगे, जब वैल्यूएशन और पैरामीटर जस्टिफाई न कर पाएं, तो सावधानी ही सबसे बड़ी रणनीति बन जाती है। बाजार में कई बार ऐसा लगता है कि “यहीं पर सब कुछ है”, लेकिन समय अक्सर यह साबित करता है कि वहां पानी कम भी हो सकता है।


(शेयर मंथन, 27 जनवरी 2026)

(आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख