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आर्थिक सर्वेक्षण : 5.4% से 5.9% जीडीपी (GDP) का अनुमान

वित्त मंत्री अरुण जेटली (Arun Jaitely) ने आज संसद में बजट से पहले देश का आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया।

इस आर्थिक समीक्षा के मुताबिक कारोबारी साल 2014-15 के लिए देश की जीडीपी 5.4% से 5.9% रहने का अनुमान है। वहीं इराक और अन्य अंतरराष्ट्रीय समस्याओं से देश की अर्थव्यवस्था के विकास पर असर पड़ सकता है। इसके साथ ही खराब मानसून भी अर्थव्यवस्था के लिए खतरा है। 

इस सर्वेक्षण में कहा गया है महँगाई में कमी आने के बाद भी यह अनुमान से काफी ज्यादा है। खराब मानसून के साथ-साथ अल-नीनो को लेकर भी चिंता बनी हुई है। ऊँची महँगाई दर की वजह से आरबीआई के पास दरें कम करने की संभावना कम है। सरकार के सामने वित्तीय घाटा और महँगाई दो बड़ी चुनौतियाँ हैं। आगामी दो सालों में वित्तीय घाटे को कम करना होगा। वित्तीय घाटे पर काबू पाने के लिए कर-जीडीपी अनुपात बढ़ाना और सब्सिडी घटाना जरूरी है। कारोबारी साल 2014-15 में मैन्युफैक्चरिंग और बैलेंस ऑफ पेमेंट में सुधार की उम्मीद है। इस दौरान चालू खाता घाटा (सीएडी) जीडीपी का 2.1% रहने का अनुमान जताया गया है। 

कृषि कमोडिटी के लिए अनुकूल कदम उठाये जाने होंगे। एपीएमसी अधिनियम में सुधार की जरूरत है। इसके साथ ही एफआरबीएम कानून को अधिक सख्त बनाये जाने की आवश्यकता है। 

सर्वेक्षण के मुताबिक बीते 2013−14 में कृषि और संबंधित क्षेत्र में विकास दर 4.7% रही है। वहीं पिछले लगातार दो सालों से देश की जीडीपी विकास दर 5% से नीचे रही है। (शेयर मंथन, 09 जुलाई 2014) 

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