सस्ते कर्ज का अगर-मगर
राजीव रंजन झा
कोई तोहफा मिले तो खुशी ही होती है। इसीलिए बैंकों की ओर से सस्ती ब्याज दरों की घोषणा पर लोग खुश हैं। रियल एस्टेट कंपनियाँ भी खुश हैं, क्योंकि उन्हें यह घोषणा डूबते को तिनके का सहारा लग रही है। निवेशक खुश हैं कि रियल एस्टेट शेयरों के भाव फिर से चढ़ने लगे हैं। बैंक खुश हैं कि अपने मार्जिन पर ज्यादा कोई दबाव डाले बिना उन्होंने सरकार को खुश कर दिया है। सरकार खुश है, क्योंकि चुनाव में डुगडुगी बजाने के लिए उसे एक और नारा मिल गया है।
