भारतीय शेयर बाजार इस समय भारी उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रहा है। कभी बाजार में जोरदार रिकवरी दिखाई देती है तो अगले ही दिन कमजोरी लौट आती है।
बाजार विशेषज्ञ अविनाश गोरक्षकर का मानना है कि जब तक वैश्विक स्तर पर चल रहे युद्ध और जियोपॉलिटिकल तनाव को लेकर स्पष्टता नहीं मिलती, तब तक बाजार में स्थिरता आना मुश्किल है। फिलहाल निवेशक इस उम्मीद में बैठे हैं कि देर-सवेर युद्धविराम या किसी समझौते की दिशा में प्रगति होगी, लेकिन तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। क्रूड ऑयल 100 डॉलर के आसपास पहुंच चुका है, जिसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। इससे एयरलाइन कंपनियों से लेकर कई उद्योगों के लागत ढांचे पर दबाव बढ़ रहा है। साथ ही रुपये की कमजोरी और बढ़ता करंट अकाउंट डेफिसिट भी चिंता का विषय बन गया है। सरकार पर फर्टिलाइजर सब्सिडी का बोझ बढ़ने की खबरें भी सामने आ रही हैं। ऐसे में निवेशकों को डर है कि आने वाले क्वार्टर में कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव बना रहेगा।
बाजार की नजर अब केवल मार्च तिमाही के नतीजों पर नहीं, बल्कि अप्रैल-जून तिमाही की संभावनाओं पर भी है। मौजूदा तिमाही में अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो कई कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि अच्छे नतीजों के बावजूद बाजार बहुत उत्साहित नजर नहीं आ रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक फिलहाल “वेट एंड वॉच” की रणनीति अपना रहे हैं और अगले कुछ हफ्तों में आने वाले वैश्विक संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। एक तरफ अमेरिकी राजनीति और चुनावी दबाव हैं, वहीं दूसरी तरफ ईरान के सामने तेल भंडारण और निर्यात से जुड़ी चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। हालांकि बाजार को उम्मीद है कि लंबे समय तक युद्ध जारी रहना दोनों पक्षों के लिए आर्थिक रूप से बेहद महंगा साबित होगा, इसलिए अंततः बातचीत और समझौते का रास्ता निकलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि पूरी तरह से हालात सामान्य होने में अभी कुछ और समय लग सकता है, लेकिन फिलहाल युद्ध के और ज्यादा भड़कने की संभावना कम दिखाई देती है।
बाजार अभी दो बड़ी चीजों पर नजर टिकाए हुए है। जियोपॉलिटिकल तनाव और कॉर्पोरेट अर्निंग्स। अगर युद्धविराम की दिशा में प्रगति होती है और तेल की कीमतों में नरमी आती है, तो बाजार में राहत की मजबूत रैली देखने को मिल सकती है। लेकिन अगर तनाव लंबा खिंचता है, तो बाजार कुछ समय तक साइडवेज और अस्थिर बना रह सकता है।
(शेयर मंथन, 01 मई 2026) (आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)