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कुसुमगर आईपीओ : डिफेंस और एयरोस्पेस के लिए हाई-टेक फैब्रिक्स बनाने वाली कंपनी, जानिए ग्रोथ की पूरी कहानी

डिफेंस और एयरोस्पेस सेक्टर से जुड़ी टेक्सटाइल कंपनी कुसुमगर लिमिटेड (Kusumgar Limited) अपना 650 करोड़ रुपये का आईपीओ लेकर आ रही है।

कंपनी के शेयर बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध होंगे। यह आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) है, यानी इससे कंपनी के पास कोई नया पैसा नहीं आएगा, बल्कि मौजूदा प्रमोटर अपने शेयर बेच रहे हैं। कंपनी का कहना है कि हाल के वर्षों में बड़े कैपेक्स के बाद उसके पास फिलहाल अपनी विकास योजनाओं के लिए पर्याप्त नकदी उपलब्ध है, इसलिए नए फंड जुटाने की जरूरत नहीं है। कुसुमगर लिमिटेड पिछले करीब 37 वर्षों से इंजीनियर्ड और स्पेशलिटी फैब्रिक्स का निर्माण कर रही है। कंपनी की शुरुआत भारतीय सेना के लिए पैराशूट फैब्रिक बनाने से हुई थी, लेकिन समय के साथ इसने एयरोस्पेस, डिफेंस, ऑटोमोटिव और हाई-परफॉर्मेंस टेक्सटाइल्स के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई। कंपनी केवल फैब्रिक ही नहीं बनाती, बल्कि पैराशूट सिस्टम, कैमोफ्लाज सिस्टम, हाई-एल्टीट्यूड क्लोदिंग और कई विशेष रक्षा उत्पाद भी तैयार करती है। इसके उत्पादों का उपयोग सियाचिन जैसे अत्यधिक ऊंचाई वाले इलाकों से लेकर आधुनिक सैन्य अभियानों तक में किया जाता है।

कंपनी का कहना है कि उसकी सबसे बड़ी ताकत उसकी तकनीकी विशेषज्ञता और लंबे समय तक चलने वाले ग्राहक संबंध हैं। जिन उत्पादों का उपयोग रक्षा क्षेत्र में होता है, उनके लिए वर्षों तक परीक्षण और क्वालिफिकेशन की प्रक्रिया चलती है। एक बार किसी उत्पाद को मंजूरी मिलने के बाद ग्राहक आसानी से सप्लायर नहीं बदलते, क्योंकि इससे गुणवत्ता और सुरक्षा से जुड़ा जोखिम बढ़ जाता है। यही वजह है कि कंपनी का बड़ा कारोबार लंबे समय तक स्थिर बना रहता है और कई मामलों में ग्राहकों के साथ एक्सक्लूसिव सप्लाई एग्रीमेंट भी होते हैं।

राजस्व के लिहाज से भी कंपनी ने पिछले कुछ वर्षों में मजबूत प्रदर्शन किया है। प्रबंधन के अनुसार वर्ष 2020 के बाद से कंपनी लगभग 35-40% की CAGR से बढ़ी है। इस तेजी के पीछे वैश्विक स्तर पर बढ़ता रक्षा खर्च, सप्लाई चेन में बदलाव और स्पेशलिटी फैब्रिक्स की बढ़ती मांग प्रमुख कारण रहे हैं। कंपनी की कुल आय में लगभग 30-40% हिस्सा निर्यात से आता है, जबकि भारतीय सेना, विदेशी सैन्य संगठन, ऑटोमोटिव कंपनियां और एक्टिववेयर ब्रांड इसके प्रमुख ग्राहक हैं।

हालांकि पिछले वित्त वर्ष में कंपनी के प्रदर्शन पर कुछ अस्थायी चुनौतियों का असर देखने को मिला। एक बड़ा रक्षा ऑर्डर अगले वित्त वर्ष में खिसक गया, अमेरिका में ट्रंप टैरिफ लागू होने से अमेरिकी बाजार में मांग प्रभावित हुई और हाल ही में किए गए कैपेक्स के कारण डिप्रिसिएशन एवं ब्याज खर्च बढ़ गया। इसके बावजूद प्रबंधन का मानना है कि ये चुनौतियां अस्थायी थीं और नए वित्त वर्ष में ऑर्डर बुक तथा मांग दोनों में सुधार देखने को मिल रहा है।

आगे की रणनीति पर कंपनी का फोकस नई तकनीकों, नए उत्पादों और नए ग्राहकों को जोड़ने पर रहेगा। हाल ही में किए गए क्षमता विस्तार के बाद फिलहाल उत्पादन क्षमता का केवल 50-60% ही उपयोग हो रहा है। ऐसे में कंपनी पहले मौजूदा क्षमता का बेहतर उपयोग करेगी और रिसर्च एवं प्रोडक्ट डेवलपमेंट के जरिए नए हाई-वैल्यू उत्पाद बाजार में उतारने पर जोर देगी। प्रबंधन का विश्वास है कि डिफेंस और स्पेशलिटी टेक्सटाइल्स की बढ़ती वैश्विक मांग आने वाले वर्षों में कंपनी की ग्रोथ को नई रफ्तार दे सकती है।


(शेयर मंथन, 09 जुलाई 2026)

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