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ट्रंप के बयान और कच्चे तेल की तेजी से बढ़ी बाजार की चिंता, निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने की सलाह

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयानों और ईरान पर तेल निर्यात से जुड़े नए प्रतिबंधों की घोषणा ने वैश्विक बाजारों में एक बार फिर अनिश्चितता बढ़ा दी है।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि  ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई दिया, जिससे ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। इसका प्रभाव केवल भारतीय शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एशियाई बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली। विश्लेषकों का मानना है कि अगर भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता है तो ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल पूरी दुनिया के बाजारों के लिए नई चुनौती बन सकता है।

बाजार विशेषज्ञ शोमेश कुमार के अनुसार, अब तक बाजार में "बाय ऑन डिप्स" की रणनीति काम कर रही थी, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम ने निवेशकों की धारणा बदल दी है। उनका कहना है कि निफ्टी, बैंक निफ्टी, मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में हालिया ऊंचाई फिलहाल एक संभावित टॉप का संकेत दे रही है। ऐसे में नई खरीदारी करने की जल्दबाजी उचित नहीं होगी। जिन निवेशकों ने पहले से निचले स्तरों पर निवेश किया है, वे अपनी होल्डिंग बनाए रख सकते हैं, लेकिन नए निवेश के लिए बाजार में स्थिरता लौटने का इंतजार करना बेहतर रहेगा। अगले दो-तीन कारोबारी सत्रों में कच्चे तेल और वैश्विक घटनाक्रम पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा।


(शेयर मंथन, 11 जुलाई 2026)

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