रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में सरकार की ओर से जमीन की होल्डिंग को डीमैट प्रणाली से जोड़ने की चर्चा ने नई बहस छेड़ दी है।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो शुरुआत में रियल एस्टेट सेक्टर में बड़ी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है, लेकिन लंबे समय में इससे उद्योग अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बन सकता है। उनका कहना है कि आज भी रियल एस्टेट में बड़ी मात्रा में नकद लेनदेन और बेनामी संपत्तियों की समस्या बनी हुई है। ऐसे में जमीन की डिजिटल मैपिंग और रिकॉर्ड का केंद्रीकरण व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, रेरा लागू होने के बाद भी रियल एस्टेट की सभी समस्याएं खत्म नहीं हुईं, लेकिन खरीदारों को पहले की तुलना में अधिक सुरक्षा जरूर मिली है। उसी तरह डीमैट आधारित भूमि रिकॉर्ड व्यवस्था भी एक दिन में बदलाव नहीं लाएगी, लेकिन पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण शुरुआत होगी। हालांकि उनका मानना है कि शुरुआती दौर में कई अनियमितताओं के सामने आने से सेक्टर में दबाव बन सकता है। इसलिए निवेशकों को निकट अवधि में उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए।
विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल रियल एस्टेट सेक्टर को रणनीतिक (Strategic) निवेश के बजाय सामरिक (Tactical) निवेश के रूप में देखना चाहिए। उनका तर्क है कि महानगरों और बड़े शहरों में संपत्तियों की कीमतें पहले ही काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी हैं, जिससे आगे तेज मूल्य वृद्धि की गुंजाइश सीमित हो गई है। भविष्य में इस सेक्टर में रिटर्न कीमतों के बजाय बिक्री की मात्रा और मांग पर अधिक निर्भर रहेगा। ऐसे में निवेशकों को लंबी अवधि के बड़े दांव लगाने के बजाय बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए संतुलित रणनीति अपनानी चाहिए।
(शेयर मंथन, 29 जुलाई 2026)
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