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निफ्टी में कंसोलिडेशन के बाद क्या आएगी नई तेजी? 24,000 का स्तर बना अहम सपोर्ट

भारतीय शेयर बाजार में पिछले हफ्ते की शुरुआत मजबूत रही, लेकिन सोमवार को बनी तेजी के ऊपरी स्तर को बाजार पूरे सप्ताह पार नहीं कर पाया।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि  इसके बाद निफ्टी में लगातार कंसोलिडेशन देखने को मिला। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक फिलहाल इसे कमजोरी के बजाय एक जरूरी पॉज के तौर पर देखा जा सकता है। हाल की तेजी के बाद बाजार में आई गर्मी को कम करने के लिए कुछ समय तक कंसोलिडेशन जरूरी हो सकता है।

तकनीकी नजरिए से इस समय 200 दिन का मूविंग एवरेज निफ्टी के लिए बड़ी बाधा बना हुआ है। बाजार को इस स्तर के ऊपर मजबूती से टिकने के लिए नई खरीदारी और मजबूत ट्रिगर की जरूरत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर निफ्टी इस बाधा को पार करता है तो आने वाले महीनों में बाजार में एक और अच्छी तेजी देखने को मिल सकती है।

हालांकि, बाजार में तत्काल तेजी की बजाय कुछ और थ्रोबैक की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों के अनुसार 24,000 का स्तर फिलहाल बेहद महत्वपूर्ण है। जब तक निफ्टी इस स्तर को क्लोजिंग बेसिस पर बनाए रखता है, तब तक बाजार के बड़े ट्रेंड को लेकर ज्यादा चिंता की जरूरत नहीं है।

वहीं, 20 डे मूविंग एवरेज करीब 24,250 के आसपास बताया गया है। अगर निफ्टी इस क्षेत्र के करीब आता है तो इसे रिस्क-रिवार्ड के नजरिए से एक महत्वपूर्ण जोन माना जा सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक इस स्तर के आसपास खरीदारी की रणनीति बनाई जा सकती है, लेकिन इसके साथ सख्त रिस्क मैनेजमेंट जरूरी रहेगा।

बाजार में अगर 24,250 के आसपास सपोर्ट मिलता है और वहां से करीब 200 से 250 अंकों का रिस्क रखा जाता है, तो संभावित रिवार्ड इसके मुकाबले ज्यादा हो सकता है। हालांकि यह रणनीति बाजार की चाल और व्यक्तिगत जोखिम क्षमता पर निर्भर करेगी। फिलहाल निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर बचाना सबसे अहम माना जा रहा है।


(शेयर मंथन, 10 अगस्त 2026)

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