सोने के साथ-साथ चाँदी में भी तेजी की तस्वीर मजबूत होती दिखाई दे रही है।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि चाँदी अक्सर सोने के मुकाबले कुछ देरी से अपनी चाल पकड़ती है, लेकिन जब तेजी आती है तो इसकी चाल ज्यादा तेज हो सकती है। इसी वजह से मौजूदा स्थिति में चांदी को लेकर सोने के मुकाबले थोड़ा ज्यादा रिटर्न का अनुमान लगाया जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी के लिए फिलहाल 80 डॉलर का स्तर एक महत्वपूर्ण लक्ष्य के तौर पर देखा जा रहा है। तकनीकी चार्ट पर जिस पैटर्न की चर्चा हो रही है, उसके आधार पर फिलहाल उम्मीद है कि चांदी इस स्तर तक पहुंच सकती है। हालांकि, अभी यह नहीं माना जा रहा कि पूरा पैटर्न पूरी तरह मजबूत हो चुका है। इसलिए $80 के आसपास की चाल को एक शुरुआती लक्ष्य के तौर पर देखना बेहतर होगा।
घरेलू बाजार में भी चांदी की चाल पर नजर बनी हुई है। तकनीकी संकेतों और संभावित गैप-फिलिंग को देखते हुए करीब 2.85 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास का स्तर महत्वपूर्ण हो सकता है। इसके अलावा जिस गैप की चर्चा की जा रही है, उसके भरने की संभावना भी चांदी की अगली चाल को मजबूत कर सकती है। अगर ये तकनीकी संकेत एक-दूसरे को कंफर्म करते हैं, तो चांदी में तेजी के लिए बेहतर आधार बन सकता है।
विशेषज्ञ चाँदी में सोने के मुकाबले थोड़ा ज्यादा रिटर्न की संभावना देख रहे हैं। जहां सोने के लिए करीब 20 फीसदी की संभावित चाल का अनुमान लगाया जा रहा है, वहीं चांदी में करीब 25 फीसदी तक की चाल का लक्ष्य रखा जा रहा है। इसकी वजह यह है कि चांदी अक्सर मिडकैप और स्मॉलकैप की तरह कुछ लैग के साथ चलती है, लेकिन जब तेजी पकड़ती है तो अपनी पिछली कमजोरी की भरपाई करते हुए ज्यादा तेज प्रदर्शन कर सकती है।
कुल मिलाकर, सोने और चाँदी दोनों में तेजी की संभावना बनी हुई है, लेकिन दोनों की चाल के पीछे अलग-अलग जोखिम भी हैं। सोने में 4,000 डॉलर का बेस और चांदी में 80 डॉलर का लक्ष्य महत्वपूर्ण स्तर बन रहे हैं। निवेशकों को इन स्तरों के साथ-साथ जियोपॉलिटिकल परिस्थितियों और तकनीकी संकेतों पर नजर रखते हुए ही कोई फैसला लेना चाहिए।
(शेयर मंथन, 11 अगस्त 2026)
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