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क्यूपिड में 40 रुपये की खरीद, 290 रुपये पर पहुंचा शेयर अब क्या करें?

क्यूपिड को लेकर शुभ सोनित्रा का सवाल है। उनके पास कंपनी के 1,810 शेयर हैं, जिन्हें उन्होंने करीब 40 रुपये के भाव पर खरीदा था। मौजूदा समय में शेयर लगभग 290 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है।

यानी निवेशक को अब तक जबरदस्त रिटर्न मिल चुका है। सवाल यह है कि इतनी बड़ी तेजी के बाद शेयर को होल्ड किया जाए, मुनाफा बुक किया जाए या आगे की तेजी का इंतजार किया जाए। बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि तकनीकी नजरिए से क्यूपिड का अपट्रेंड अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, लेकिन मौजूदा स्तर पर जोखिम काफी बढ़ गया है। शेयर बहुत तेजी से ऊपर आया है और इस तरह की तेज रफ्तार के बाद करेक्शन भी उतना ही तेज हो सकता है। इसलिए यहां सबसे जरूरी चीज रिस्क मैनेजमेंट है। अगर निवेशक लंबे समय का ट्रेंड देख रहे हैं तो करीब 225 रुपये के नीचे का करेक्शन एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है। जब तक शेयर इस स्तर के ऊपर बना रहता है, तब तक इसका लंबा ट्रेंड पूरी तरह खत्म माना नहीं जाएगा।

वहीं, अगर निवेशक केवल मौजूदा मोमेंटम के आधार पर रणनीति बना रहे हैं तो करीब 250 रुपये का स्तर महत्वपूर्ण हो सकता है। इसके नीचे जाने पर मौजूदा तेजी का मोमेंटम कमजोर पड़ने के संकेत मिल सकते हैं। इसलिए निवेशक अपनी रणनीति के अनुसार 250 या 225 रुपये जैसे स्तरों को ट्रेलिंग रिस्क मैनेजमेंट के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

क्यूपिड में सबसे बड़ी चुनौती इसका मौजूदा वैल्यूएशन है। शेयर के पीई मल्टीपल के करीब 300 तक पहुंचने की बात कही जा रही है। किसी भी बिजनेस के लिए इतने ऊंचे पीई को सामान्य फंडामेंटल वैल्यूएशन के आधार पर उचित ठहराना मुश्किल होता है। इसलिए इस स्तर पर शेयर को केवल फंडामेंटल वैल्यूएशन के आधार पर देखना जोखिम भरा हो सकता है। मौजूदा स्थिति में चार्ट और प्राइस ट्रेंड के आधार पर रिस्क मैनेजमेंट ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है।

निवेशक के सामने दो तरह की दुविधा है। पहली यह कि अगर 300 रुपये के आसपास मुनाफा बुक नहीं किया और शेयर गिरकर काफी नीचे आ गया तो हाथ में आया मुनाफा कम हो सकता है। दूसरी तरफ, अगर 300 रुपये के आसपास पूरी तरह बाहर निकल गए और शेयर बाद में 400 रुपये तक पहुंच गया तो तेजी का हिस्सा छूट सकता है। ऐसे में पूरा निवेश एक साथ बेचने या पूरी तरह होल्ड करने के बजाय धीरे-धीरे मुनाफा निकालने की रणनीति अपनाई जा सकती है।

इस रणनीति का एक तरीका यह है कि जैसे-जैसे निवेश का मूल्य दोगुना, तिगुना या उससे आगे बढ़े, निवेशक समय-समय पर अपनी पूंजी का एक हिस्सा निकालता जाए। इससे शेयर में तेजी जारी रहने पर निवेशक उसमें बने रह सकता है और दूसरी तरफ गिरावट आने पर पहले से निकाला गया पैसा सुरक्षित रह सकता है।


(शेयर मंथन, 21 अगस्त 2026)

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