बाजार में इस समय कंजम्पशन थीम को लेकर उम्मीदें बढ़ रही हैं।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि आने वाले समय में डिस्पोजेबल इनकम और घरेलू खपत बाजार के लिए अहम थीम बन सकती है। उन्होंने 2021 के कैपेक्स साइकिल का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह उस समय कैपेक्स को एक बड़े निवेश थीम के रूप में देखा गया था, उसी तरह 2025 के बाद कंजम्पशन को एक लंबी अवधि की थीम के तौर पर देखा जा सकता है। एसी, कूलर जैसी कंजम्पशन से जुड़ी कंपनियों में लंबे समय बाद खरीदारी लौटना भी इस दिशा में एक संकेत माना जा सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि निवेशक सिर्फ इस संकेत के आधार पर किसी खास शेयर को खरीद लें। यह एक थीम का संकेत है और इसमें वास्तविक रिकवरी आने में छह महीने या एक साल से अधिक समय भी लग सकता है।
बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों को लेकर बाजार में बढ़े हुए निराशावाद की ओर भी ध्यान दिलाया। उनका तर्क है कि कंजम्पशन और क्रेडिट एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, क्योंकि बड़ी खरीदारी और खपत को बढ़ाने में क्रेडिट की भूमिका अहम होती है। ऐसे में अगर कंजम्पशन में तेजी आती है तो क्रेडिट से जुड़े कारोबार भी उसका फायदा उठा सकते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर बैंक या हर फाइनेंशियल शेयर में तेजी आएगी। निवेशकों को कंपनियों की गुणवत्ता और वैल्यूएशन के आधार पर चयन करना होगा। विशेषज्ञ की रणनीति लंबी अवधि के 4-5 साल के साइकिल को ध्यान में रखकर कंजम्पशन और क्रेडिट को पोर्टफोलियो की थीम के रूप में देखने की है।
(शेयर मंथन, 14 सितंबर 2026)
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