कच्चे तेल और नेचुरल गैस की कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत - एसएमसी
कोरोना वायरस मामलों के बढ़ोतरी के बीच ईंधन की माँग में वृद्धि को लेकर चिंता और एक नये स्टीमुलस सौदे पर संयुक्त राज्य में वार्ता रुकने से कच्चे तेल की कीमतें उच्च स्तर से फिसल गयी है।
कोरोना वायरस मामलों के बढ़ोतरी के बीच ईंधन की माँग में वृद्धि को लेकर चिंता और एक नये स्टीमुलस सौदे पर संयुक्त राज्य में वार्ता रुकने से कच्चे तेल की कीमतें उच्च स्तर से फिसल गयी है।
बेस मेटल की कीमतों के एक दायरे में कारोबार करने की संभावना हैं, लेकिन उच्च स्तर पर मुनाफा वसूली से इनकार नहीं किया जा सकता है।
सर्राफा की कीमतें अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुँच गयी हैं और लगातार नौवें हफ्ते बढ़त दर्ज की है।
कॉटन वायदा (अगस्त) की कीमतों को 16,150 रुपये के पास सहारा मिलने की उम्मीद है, जबकि कीमतों में 16,500-16,700 रुपये तक बढ़ोतरी हो सकती है।
हल्दी वायदा (सितम्बर) की कीमतों के 5,750-6,050 रुपये के दायरे में मजबूत होने की संभावना है और कीमतों की बढ़त पर रोक लगी रह सकती है।
सोयाबीन वायदा (सितम्बर) की कीमतों में 3,700 के सहारा के साथ 3,930-4,000 रुपये तक बढ़त दर्ज किये जाने की संभावना है।
कच्चे तेल की कीमतों के तेजी के रुझान के साथ सीमित दायरे में कारोबार करने की संभावना हैं और कीमतों को 3,260 रुपये के स्तर पर अड़चन के साथ 3,080 के स्तर पर सहारा रह सकता है।
बेस मेटल की कीमतों के नरमी के रुझान के साथ सीमित दायरे में कारोबार करने की संभावना हैं।
सर्राफा की कीमतों की तेजी पर रोक लग सकती है और गिरावट दर्ज की जा सकती है।
सोयाबीन वायदा (सितम्बर) की कीमतों में 3,770 रुपये के सहारा के साथ 3,860-3,880 रुपये तक बढ़त दर्ज किये जाने की संभावना है।
हल्दी वायदा (सितम्बर) की कीमतों के 5,850-5,950 रुपये के दायरे में मजबूत होने की संभावना है और कीमतों की बढ़त पर रोक लगी रह सकती है।
101 रक्षा उत्पादों के आयात पर रोक से अगले 6-7 वर्षों में घरेलू उद्योग को लगभग 4 लाख करोड़ रुपये के ठेके हासिल होंगे। इस बात को ध्यान में रख कर किन शेयरों को लेकर बाजार में सबसे ज्यादा उत्साह नजर आने की संभावना है?
मोदी सरकार ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए 101 वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने रविवार की सुबह 101 रक्षा उत्पादों के आयात पर रोक (import ban) की घोषणा करते हुए यह जानकारी दी कि अप्रैल 2015 से अगस्त 2020 के बीच देश की तीनों सेनाओं ने इन वस्तुओं की लगभग 260 योजनाओं के ठेके दिये, जिनकी लागत लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपये की है।
रक्षा मंत्रालय ने आत्मनिर्भर भारत अभियान को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्त्वपूर्ण घोषणा की है। इसने स्वदेशी रक्षा उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए 101 वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है।