शेयर मंथन में खोजें

बीएनपी पारिबास ने घटायी एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस (SBI Life Insurance) में हिस्सेदारी

बीएनपी पारिबास कार्डिफ (BNP Paribas Cardif) ने एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस (SBI Life Insurance) में हिस्सेदारी घटायी है।

बीएनपी पारिबास ने ओपन मार्केट लेन-देन के जरिये जीवन बीमा कंपनी की 5.07% हिस्सेदारी बेच दी। इसके बाद एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस में बीएनपी पारिबास की हिस्सेदारी 12.77% से घट कर 7.70% रह गयी है।
बता दें कि बीएनपी पारिबास स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (State Bank of India) के बाद एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस की दूसरी प्रमोटर कंपनी है। बीएनपी परिबास ने सितंबर 2018 में न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए एसबीआई लाइफ में अपनी हिस्सेदारी को घटाने पर विचार करने का ऐलान किया था। नियानुसार एक कंपनी में न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी 25% होनी चाहिए।
बीएनपी पारिबास द्वारा हिस्सेदारी बेचने की खबर का एसबीआई लाइफ के शेयर पर आज नकरात्मक असर देखने को मिला। बीएसई में एसबीआई लाइफ का शेयर 616.75 रुपये के पिछले बंद भाव के मुकाबले हल्की गिरावट के साथ 616.00 रुपये पर खुला। कारोबार के दौरान 577.50 रुपये का निचला स्तर छूने के बाद अंत में यह 37.20 रुपये या 6.03% की कमजोरी के साथ 579.55 रुपये पर बंद हुआ। इस भाव पर कंपनी की बाजार पूँजी 57,955.00 करोड़ रुपये है। वहीं पिछले 52 हफ्तों की अवधि में कंपनी का शेयर 774.75 रुपये के ऊपरी स्तर तक चढ़ा और 487.00 रुपये के निचले भाव तक फिसला है। (शेयर मंथन, 29 मार्च 2019)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख