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भारी उतार-चढ़ाव के बीच बाजार मामूली बढ़त पर बंद

वैश्विक बाजारों से सुस्त संकेत देखने को मिले। अमेरिकी बाजार में सीमित दायरे में कारोबार हुआ। डाओ जोंस 50 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ। वहीं एसऐंडपी 500,नैस्डैक पर हल्की बढ़त रही। गिफ्ट निफ्टी की करीब 50 अंकों की कमजोरी के साथ शुरुआत हुई।

भारी उतार-चढ़ाव के बीच बाजार में गिरावट, निफ्टी 219 , सेंसेक्स 638 अंक गिरकर बंद

वैश्विक बाजार से अच्छे संकेत देखने को मिले। शुक्रवार को अमेरिकी बाजार में अच्छी खरीदारी दिखी। डाओ जोंस ने 340 अंकों के उछाल के साथ रिकॉर्ड स्तर पर बंद हुआ। वहीं नैस्डैक में 1.2% या 240 अंकों की बढ़त दिखी। पिछले हफ्ते डाओ जोंस 0.1%, नैस्डेक 0.1% और S&P 500 0.2% की बढ़त के साथ बंद हुए।

भारी उतार-चढ़ाव के बीच बाजार लगातार छठे दिन गिरावट पर बंद

वैश्विक बाजारों में आज फिर सुस्ती का माहौल देखा गया। एशियाई बाजारों में भारी गिरावट देखी गई।

भारी उतार-चढ़ाव के बीच बाजार में गिरावट, निफ्टी 235, सेंसेक्स 808 अंक गिरकर बंद

वैश्विक बाजार से कमजोरी के संकेत देखने को मिली। गुरुवार को अमेरिकी बाजार कमजोरी के साथ बंद हुए। मिडिल-ईस्ट इलाके में बढ़ते तनाव का असर देखा गया। इजरायल की ओर से हमला जारी रखने की चेतवानी का असर बाजार पर दिखा। डाओ जोंस 0.44% या 185 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ।

भारी उतार-चढ़ाव के बीच बाजार हरे निशान में बंद

उतार चढ़ाव के बीच शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों में बढ़त देखने को मिली। निचले स्तर से डाओ 450 अंक सुधरकर 130 अंक ऊपर बंद होने में कामयाब रहा। रिपोर्ट्स के मुताबिक बैंकिंग सेक्टर के लिए फंडिंग प्रोग्राम को बढ़ाया जा सकता है,अभी भी बैंक्स से डिपॉजिटर्स तेजी से पैसा निकाल रहे हैं।

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    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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