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12 साल में 10 लाख छोटे कारोबारियों को लोन, अब आईपीओ के जरिये विस्तार की तैयारी

आय फाइनेंस के फाउंडर एवं मैनेजिंग डायरेक्टर संजय शर्मा और सीएफओ सोवन सत्यप्रकाश ने बताया कि कंपनी पिछले 12 वर्षों से माइक्रो एंटरप्राइजेज को बिजनेस लोन देने पर फोकस कर रही है।

उनका कहना है कि भारत में कृषि को छोड़ दें तो गैर-कृषि क्षेत्र में सबसे ज्यादा रोजगार माइक्रो एंटरप्राइजेज से ही पैदा होता है, लेकिन दस्तावेजों की कमी के कारण इन्हें बैंकों और बड़ी एनबीएफसी से कर्ज मिलना मुश्किल होता है। इसी समस्या को हल करने के मकसद से आय फाइनेंस की शुरुआत की गई। अब तक कंपनी 10 लाख से ज्यादा माइक्रो उद्यमों को फंड कर चुकी है और करीब 6 लाख सक्रिय ग्राहक हैं। कंपनी 21 राज्यों में काम कर रही है और उसका पोर्टफोलियो लगातार बढ़ रहा है।

कंपनी प्रबंधन ने बताया कि हाल के वर्षों में कंपनी की ग्रोथ काफी तेज रही है। वित्त वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच कंपनी का रेवेन्यू ढाई गुना तक बढ़ा है और मुनाफा लगभग चार गुना हो गया है। हालांकि प्रबंधन का मानना है कि बहुत ज्यादा आक्रामक ग्रोथ बाद में एनपीए और क्रेडिट कॉस्ट की समस्या खड़ी कर सकती है, इसलिए कंपनी अब ग्रोथ को नियंत्रित गति से आगे बढ़ा रही है। फिलहाल कंपनी की सालाना ग्रोथ करीब 20–25% के दायरे में रखी जा रही है ताकि लोन की गुणवत्ता बनी रहे और डिफॉल्ट का खतरा कम हो।

आईपीओ के जरिए जुटायी गई पूंजी के इस्तेमाल पर सीएफओ ने बताया कि कंपनी की डेब्ट-टू-इक्विटी रेशियो लगभग 3 के आसपास रखी जाती है। आईपीओ से जुटाई गई नई इक्विटी और भविष्य में होने वाले मुनाफे को मिलाकर कंपनी अगले कुछ वर्षों में अपने एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) को मौजूदा करीब 6,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 15,000 करोड़ रुपये तक ले जाने का लक्ष्य रखती है। कर्ज की लागत में भी धीरे-धीरे कमी आई है, हालांकि पोर्टफोलियो में मॉर्गेज लोन का हिस्सा बढ़ाने से यील्ड थोड़ी कम हुई है, जिसका फायदा आगे ऑपरेटिंग खर्च और क्रेडिट कॉस्ट में कमी के रूप में मिलने की उम्मीद है।

ओएफएस को लेकर संजय शर्मा ने साफ किया कि वे खुद अपनी हिस्सेदारी नहीं बेच रहे हैं। कुछ पुराने निवेशक अपने फंड की अवधि पूरी होने के कारण एग्जिट कर रहे हैं, जबकि कई प्राइवेट इक्विटी निवेशक आगे भी लंबे समय तक कंपनी में बने रहेंगे। आईपीओ की प्राइसिंग पर प्रबंधन ने बताया कि रिटर्न ऑन इक्विटी और रिटर्न ऑन एसेट जैसे मापदंडों को ध्यान में रखते हुए और निवेशकों व बैंकरों से मिले फीडबैक के आधार पर वैल्यूएशन तय किया गया है, ताकि नए निवेशकों के लिए यह आकर्षक रहे।

(शेयर मंथन, 06 फरवरी 2026)

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