चाँदी की बात करें तो इसमें हालिया तेजी काफी हद तक स्पेकुलेशन से आयी हुई दिखती है। इस समय चाँदी की चाल को नजरअंदाज करना मुश्किल है। हाल के दिनों में इसमें जो जबरदस्त उतार-चढ़ाव दिख रहा है।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार कहते है कि चाँदी की बात करें तो इसमें हालिया तेजी काफी हद तक स्पेकुलेशन से आई हुई दिखती है। सोना बहुत महँगा हो जाने के बाद कई लोग सस्ते विकल्प के तौर पर चाँदी की ओर भागे, जिससे इसके दाम तेजी से बढ़े। हालांकि चाँदी को इंडस्ट्रियल मेटल कहा जाता है, लेकिन जब इनपुट कॉस्ट ही बहुत ज्यादा बढ़ जाए, तो उससे जुड़े उद्योगों पर दबाव बढ़ता है। इसलिए चांदी की मौजूदा कीमतों पर भी जोखिम बना हुआ है और इसमें उतनी मजबूती नजर नहीं आती जितनी सोने में दिखती है।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सोना-चांदी को पोर्टफोलियो का छोटा हिस्सा ही रखना बेहतर रणनीति मानी जाती है। आम तौर पर कुल निवेश का 5 से 10 प्रतिशत हिस्सा ही इन कीमती धातुओं में होना चाहिये। बहुत ज्यादा हिस्सेदारी बनाना जोखिम भरा हो सकता है, चाहे कितनी भी आकर्षक कहानियां क्यों न सुनाई जाएं। खासकर जब भाव बहुत ऊँचे हों, तब अनुशासन बनाए रखना सबसे ज्यादा जरूरी होता है।
जो लोग चाँदी में निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए सिल्वर ईटीएफ एक विकल्प हो सकता है, लेकिन इसमें भी सावधानी जरूरी है। ईटीएफ में डिमांड ज्यादा होने पर कीमतों में प्रीमियम आ जाता है और कैरी कॉस्ट के कारण निवेशक को अतिरिक्त खर्च झेलना पड़ता है। इसलिए बेहतर यही है कि अगर कभी भाव नीचे के दायरे में मिलें, तो छोटे-छोटे हिस्सों में धीरे-धीरे निवेश किया जाए और नजरिया 3 से 5 साल का रखा जाए। तुरंत मुनाफे की उम्मीद करना इस समय समझदारी नहीं होगी।
सोना और चाँदी दोनों में अभी अनिश्चितता बनी हुई है। न तो यह पूरी तरह सुरक्षित जोन में पहुँचे हैं और न ही साफ-साफ नई तेजी के संकेत दे रहे हैं। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए सबसे जरूरी है संयम, अनुशासन और लंबी अवधि की सोच। जल्दबाजी में फैसले लेने से बेहतर है कि बाजार को शांत होने दिया जाए और फिर ठोस संकेतों के साथ कदम बढ़ाया जाये।
(शेयर मंथन, 07 फरवरी 2026)
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