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बड़ी गिरावट के बाद सोने में उछाल, क्या यह नयी तेजी है?

इस समय सोना और चाँदी की चाल को नजरअंदाज करना मुश्किल है। हाल के दिनों में इनमें जो जबरदस्त उतार-चढ़ाव दिख रहा था, उसके मुकाबले अब थोड़ी शांति जरूर नजर आ रही है।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार कहते है कि लेकिन यह स्थिरता सिर्फ तुलनात्मक है। असल में रोज़ बनने वाली कैंडल्स अभी भी काफी बड़ी हैं, यानी वोलैटिलिटी कम नहीं हुई है। एमसीएक्स पर सोना हाल ही में बड़ी गिरावट के बाद फिर ऊपर लौटा है, लेकिन तकनीकी रूप से यह मान लेना जल्दबाज़ी होगी कि करेक्शन पूरा हो गया है और अब नई तेज़ी शुरू हो चुकी है। जब तक वोलैटिलिटी पूरी तरह शांत नहीं होती, तब तक यह कहना मुश्किल है कि सोना खतरे से बाहर आ चुका है। 

सोने में फिलहाल नीचे की तरफ जोखिम ज्यादा दिखाई देता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके चार्ट में “लोअर टॉप” का पैटर्न बन रहा है, जो यह संकेत देता है कि अभी करेक्शन खत्म नहीं हुआ है। जब तक कीमतें एक मजबूत सपोर्ट जोन में जाकर स्थिर नहीं होतीं और वहां से टिकाऊ डिमांड नहीं आती, तब तक हर उछाल को नई तेजी मानना जोखिम भरा हो सकता है। बड़े खरीदार यानी सेंट्रल बैंक आमतौर पर निचले स्तरों पर ही मजबूत खरीदारी करते हैं, इसलिए लंबी अवधि के निवेशकों के लिए बेहतर होगा कि वे अभी धैर्य रखें और बहुत ऊँचे भाव पर जोश में आकर एंट्री न करें।

ट्रेडिंग के लिहाज से भी मौजूदा माहौल आसान नहीं है। जब बाजार में वोलैटिलिटी बहुत ज्यादा होती है, तो छोटे निवेशकों के लिए पैसा और धैर्य,  दोनों जलने का खतरा रहता है। ऐसे समय में न तो साफ-साफ ट्रेंड बनता है और न ही रिस्क-रिवार्ड संतुलित रहता है। इसलिए बहुत एक्टिव ट्रेडिंग करने की बजाय फिलहाल सतर्क रहना ज्यादा समझदारी भरा कदम हो सकता है। जो निवेशक हैं, उनके लिए भी बेहतर यही है कि वे जल्दबाज़ी न करें और साफ संकेतों का इंतजार करें।


(शेयर मंथन, 07 फरवरी 2026)

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