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उर्वरक सब्सिडी जारी करने की प्रक्रिया में बदलाव

आर्थिक सुधारों की ओर केंद्र सरकार ने एक और कदम उठाया है।
अब सरकार ने उर्वरक सब्सिडी जारी करने की प्रक्रिया में सुधार को मंजूरी दे दी है।
आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने अब कंपनियों को वास्तविक बिक्री के आधार पर ही सब्सिडी भुगतान करने का फैसला किया है। उर्वरक के खुदरा विक्रेताओं द्वारा बिक्री रसीद पेश किए जाने के आधार पर ही सब्सिडी का भुगतान किया जायेगा।
इस व्यवस्था पर मोबाइल फर्टिलाइजर मॉनिटिरिंग सिस्टम (एमएफएमएस) तथा उर्वरक निगरानी प्रणाली (एफएमएस) के जरिये नजर रखी जायेगी।
उर्वरक के मामले में सरकार अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) तय करती है। एमआरपी और उत्पादन लागत में अंतर के बराबर की राशि सरकार उर्वरक कंपनियों को सब्सिडी के रूप में भुगतान करती है। हालाँकि फॉस्फेट और पोटाश उर्वरकों के मामले में एमआरपी का निर्धारण नहीं करती है, जबकि सब्सिडी तय की जाती है। (शेयर मंथन, 11 अक्टूबर 2012)

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