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शुक्रवार 2 सितंबर : बड़ी कारोबारी सुर्खियाँ (Top Business News)

बीएसई सेंसेक्स (Sensex) आज 108.63 अंक या 0.38% की बढ़त के साथ 28,532.11 पर बंद हुआ। एनएसई का निफ्टी 50 (Nifty 50) 35 अंक या 0.40% की मजबूती के साथ 8,809.65 पर रहा, जो अप्रैल 2015 के बाद से इसका सबसे ऊँचा स्तर है।

गुरुवार 1 सितंबर : बड़ी कारोबारी सुर्खियाँ (Top Business News)

रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) ने आज अपनी सालाना बैठक में अपनी मोबाइल सेवा रिलायंस जिओ (Reliance Jio) की काफी सस्ती दरों के बारे में घोषणा की, जिसके बाद आइडिया सेल्युलर (Idea Cellular) के शेयर में 10.48%, रिलायंस कम्युनिकेशंस (Reliance Communications) में 8.81%, भारती एयरटेल (Bharti Airtel) में 6.37% और टाटा कम्युनिकेशंस में 2.78% की गिरावट दर्ज की गयी।

बुधवार 31 अगस्त : बड़ी कारोबारी सुर्खियाँ (Top Business News)

अप्रैल-जून 2016 यानी 2016-17 की पहली तिमाही के दौरान देश की जीडीपी (GDP) बढ़ने की दर या विकास दर 7.1% रही है। जनवरी-मार्च 2016 के दौरान भारत की जीडीपी में 7.9% की दर से बढ़ोतरी दर्ज की गयी थी, जबकि पिछले साल की अप्रैल-जून तिमाही में यह दर 7.5% थी।

जीडीपी (GDP) विकास दर अप्रैल-जून तिमाही में हुई धीमी

भारतीय अर्थव्यवस्था की चाल फिर से कुछ धीमी पड़ी है। मुख्य रूप से कृषि, निर्माण (कंस्ट्रक्शन) और खनन (माइनिंग) गतिविधियों में कमी दर्ज किये जाने के कारण विकास दर अपेक्षाकृत धीमी पड़ी है।

मंगलवार 30 अगस्त : बड़ी कारोबारी सुर्खियाँ (Top Business News)

वित्त मंत्री अरुण जेटली (Arun Jaitley) ने केंद्रीय कर्मचारियों को 2014-15 और 2015-16 के बकाये बोनस का भुगतान किये जाने की घोषणा की है। यह बोनस सातवें वेतन आयोग के मुताबिक संशोधित दरों पर दिया जायेगा।

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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