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कंपनियों ने आईपीओ के जरिये पूँजी बाजार से इस साल 19% तक अधिक पूँजी जुटायी

भारतीय कंपनियों ने वित्त वर्ष 2023-24 में प्राथमिक पूँजी बाजार से 61,915 करोड़ रुपये जुटाये हैं। पूँजी बाजार पर आँकड़े जुटाने वाली संस्था प्राइम डाटाबेस के मुताबिक यह राशि वित्त वर्ष 2022-23 में जुटायी गयी 52,116 करोड़ रुपये से 19% अधिक है।

बीईएल को 2282.06 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला

देश की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की नवरत्न डीपीएसयू भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) ने मंगलवार (13 फरवरी 2024) को भारतीय नौसेना के साथ 2,167.47 करोड़ रुपये के मूल्य के एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किया है।

आरबीआई की ब्याज दरों या नीतिगत रुख में बदलाव नहीं होना अनुमानों के अनुरूप

निखिल गुप्ता, मुख्य अर्थशास्त्री, एमओएफएसएल समूह
आरबीआई ने अपनी मौद्रिक नीति को अपरिवर्तित रखा है, जैसा कि व्यापक रूप से अपेक्षित था। ब्याज दरों या नीतिगत रुख में कोई बदलाव नहीं हुआ। दोनों मसलों पर एमपीसी में 5-1 का मत रहा। इसके अलावा, गवर्नर ने फिर से 4% का मुद्रास्फीति लक्ष्य प्राप्त करने के महत्व पर जोर दिया।

शेयर बाजार के लिए एक सकारात्मक बजट

आशीषकुमार चौहान
एमडी और सीईओ, एनएसई
मैं अंतरिम बजट को 10 में से 10 नंबर देता हूँ। यह बजट नीतियों और कराधान (taxation) पर निरंतरता सुनिश्चित करते हुए विकास, कल्याणवाद और राजकोषीय संयम (Fiscal Prudence) पर केंद्रित है।

2023 में आईपीओ से पैसे जुटाने में आयी 17% गिरावट : प्राइमडाटाबेस

साल 2023 में पूँजी बाजार से पैसे जुटाने के मामले में 17% की गिरावट आयी है। यह जानकारी प्राथमिक पूँजी बाजार पर आँकड़े जुटाने वाली संस्‍था प्राइमडाटाबेस की हालिया रिपोर्ट में दी गयी है।

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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