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पैदावार घटने से बढ़ सकती हैं दालों की कीमतें

इस वर्ष दालों की पैदावार में गिरावट आने से आने वाले दिनों में दालों की कीमतों में मजबूती बनी रहने की संभावना है।

पिछले 15 दिनों में मूँग और तुअर की खुदरा कीमतें पहले ही 4-10 रुपये प्रति किलोग्राम तक उछल चुकी हैं। सरकारी ऑकड़ों पर गौर करें, तो इस साल दालों की पैदावार में 10% की गिरावट की संभावना है। ग्राउंड रिपोर्ट में रबी (जून-सितंबर) दालों के उत्पादन में गिरावट का सुझाव दिया गया है। खरीफ दालों में भी (अक्टूबर-मार्च), बुआई का क्षेत्रफल 157 लाख हेक्टेयर से गिरकर पिछले सप्ताह तक 149 लाख हेक्टेयर हो गया था। इसके अलावा, शीत लहरी और बेमौसम बारिश से खड़ी फसल को नुकसान पहुँचने की संभावना जतायी जा रही है।
पिछले दो सीजन में दालों की बंपर पैदावार देखी गयी थी, जिसने भारत को आयात में कटौती करने के साथ-साथ अतिरिक्त मात्रा में निर्यात करने के लिए प्रेरित किया। 2016-17 में, भारत में 2.313 करोड़ टन दालों का उत्पादन हुआ था। इसके बाद 2017-18 में 2.523 करोड़ टन पैदावार हुयी थी। जिससे दालों के निर्यात में लगभग 150% का भारी उछाल देखा गया था, जिसमें अप्रैल-नवंबर 2018 के दौरान 2.15 लाख टन और पिछले वर्ष की समान अवधि के दौरान 87,896 टन की शिपिंग हुयी थी। एक अनुमान के मुताबिक 2018-19 में, दालों का उत्पादन 2.2 करोड़ टन होने की संभावना है, जो भारत की 2.5 करोड़ टन की आवश्यकता को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। इसके अलावा अभी 3.6 करोड़ टन का बफर स्टॉक भी है। (शेयर मंथन, 31 जनवरी 2019)

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