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केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने आईबीसी (IBC) में संशोधन के अध्‍यादेश को दी मंजूरी

मंगलवार को केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने ऋणशोधन अक्षमता और दिवालियापन संहिता 2016 (IBC 2016) में संशोधन करने के लिए अध्‍यादेश जारी करने के प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी। सरकार ने उम्मीद जतायी है कि इस संशोधन से इस संहिता की विसंगतियाँ दूर हो जायेंगी और इसका सुचारु रूप से बेहतर क्रियान्वयन हो सकेगा। इस संशोधन के लागू होने के बाद दिवाला समाधान प्रक्रिया आरंभ होने से पूर्व किये गये किसी अपराध के लिए कॉर्पोरेट कर्जदार पर कोई देनदारी नहीं बनेगी।
संशोधन के मुताबिक अधिनिर्णयन प्राधिकरण (adjudicating authority) की ओर से समाधान योजना को मंजूरी देने की तारीख से ही इस तरह के अपराध के लिए कॉरपोरेट कर्जदार पर मुकदमा नहीं चलाया जायेगा यदि समाधान योजना के फलस्‍वरूप संबंधित कंपनी का नियंत्रण ऐसे व्‍यक्ति के हाथों में चला जाता है जो न तो प्रवर्तक था और न ही प्रबंधन में था।
ध्यान रहे कि केन्द्र सरकार ने इस आईबीसी 2016 के संशोधन के लिए 12 दिसंबर को लोक सभा में विधेयक प्रस्तुत किया था, जो आईबीसी के तहत नये खरीदारों के हितों की रक्षा का प्रस्ताव करता है क्योंकि आईबीसी के तहत बिक रही संपत्तियों के लिए बोली लगाने वाली कई कंपनियों ने चिन्ता जाहिर की थी कि पूर्व प्रवर्तकों पर चल रहे मामलों में वे कहीं स्वयं तो नहीं फँस जायेंगे। इससे पहले भी आईबीसी 2016 में तीन बार संशोधन हो चुके हैं। (शेयर मंथन, 25 दिसंबर 2019)

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