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गिरवी शेयरों पर अटकलों का दौर अब खत्म

राजीव रंजन झा

अब आपको ऐसी अटकलें सुनने को नहीं मिलेंगीं कि फलाँ कंपनी के प्रमोटरों ने अपने शेयर गिरवी रख कर कर्ज उठाया है। अब यह अटकलें भी नहीं होंगीं कि गिरवी रखे गये शेयरों की संख्या कितनी है। अटकलों के बदले आपको सीधे इस बात की औपचारिक जानकारी होगी। यह जानकारी स्टॉक एक्सचेंजों के माध्यम से हर निवेशक को उपलब्ध होगी। धन्यवाद सेबी। 

हाल में केवल सत्यम की घटना ने इस जानकारी के महत्व को सामने नहीं रखा था। ऐसे कई मामले सामने आये, जिसमें इस तरह की चर्चाओं ने बाजार में किसी कंपनी के शेयर भावों में उठापटक को जन्म दिया। सत्यम के मामला सामने आने के बाद से अचानक ही रियल एस्टेट शेयरों में बिकवाली की लहर शुरू हो जाने को भी इसी कड़ी का एक हिस्सा माना जा सकता है।
सेबी ने पहले जब यह संकेत दिया था कि वह ऐसे प्रस्ताव पर विचार करने जा रही है, तब से कुछ लोग यह कहते सुने गये कि मौजूदा माहौल में यह कदम उल्टा असर भी पैदा कर सकता है। इस समय बाजार में एक ऐसा माहौल बन गया है कि जिस किसी कंपनी के प्रमोटरों ने अपने शेयर गिरवी रखे हों, उससे बाहर निकल जाओ। इसलिए अगर अभी ऐसी कंपनियों की पुख्ता जानकारी सामने आयेगी तो ऐसे तमाम शेयरों में बड़ी बिकवाली शुरू हो जायेगी और यह खुद शेयरधारकों के हित में नहीं होगा। मैं इस तर्क से सहमत नहीं। पहले ही बाजार में तमाम कंपनियों के बारे में अटकलें चल रही हैं। अटकलों के बदले पुख्ता जानकारी मिलना हमेशा बेहतर है।
यह भी समझने की जरूरत है कि शेयर गिरवी रखना हर मामले में गलत या जोखिम भरा नहीं होता। यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि कंपनी में प्रमोटरों की कुल हिस्सेदारी कितनी है और उसकी तुलना में गिरवी रखे गये शेयरों का अनुपात कितना है। यह भी समझने की जरूरत होती है कि शेयरों को गिरवी रखने का मकसद क्या है। साथ में यह भी देखा जाना चाहिए कि क्या हाल में प्रमोटर लगातार अपनी हिस्सेदारी घटाते चले आ रहे हैं, जैसा कि सत्यम के मामले में साफ दिखता है।
कुल मिलाकर सीधी बात यह है कि अब गिरवी रखे गये शेयरों के बारे में निवेशकों को हमेशा एक साफ तस्वीर दिखती रहेगी और उसके आधार पर वे खुद अपना विश्लेषण कर सकते हैं, अपने फैसले कर सकते हैं। क्या पहली बार यह जानकारी सामने आने पर कुछ शेयरों को बड़ा झटका लगेगा? लगता है तो लगे, यह बाजार की सेहत के लिए अच्छा ही होगा।

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