नये साल की दूसरी छमाही विकास के अनुकूल रहेगी
नीलेश शाह, डिप्टी एमडी, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी
वैश्विक और भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए साल 2009 संक्रमण का साल होगा। देश के लिए साल के पहले 6 महीने बुनियादी बातों के बजाय घटनाओं से संचालित होंगे। इस दौरान जारी किये जाने वाले आर्थिक आँकड़े वैश्विक स्तर पर कमजोरी और उसकी वजह से माँग में आयी कमी के गवाह बनेंगे। कारोबार में कमी, मार्जिन पर दबाव और सरकारी घाटे की वजह से कॉरपोरेट क्षेत्र के मुनाफे पर असर पड़ेगा। वैश्विक वित्तीय संकट की वजह से पूँजी का प्रवाह सीमित हो जायेगा। इस बात पर ध्यान केंद्रित रहेगा कि राहत योजनाओं और मौद्रिक नीतियों से किस तरह विकास दर को रफ्तार को कायम रखा जाये।
पी के अग्रवाल, प्रेसिडेंट (रिसर्च), बोनांजा पोर्टफोलिओ