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वित्त मंत्री की अपनी सीमाएँ थीं: हरिहर

T.S. Hariharआईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के सीनियर वीपी टी एस हरिहर का मानना है कि इस अंतरिम बजट को पेश करते समय कार्यकारी वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के सामने अपनी सीमाएँ थीं। हरिहर का कहना है कि मुझे कुछ घोषणाएँ होने की उम्मीद थी, लेकिन वित्त मंत्री ने केवल सरकार का रिपोर्ट कार्ड पढ़ने का काम किया। लेकिन बाजार की निराशा की वजह यह रही है कि इसने अंतरिम बजट से काफी उम्मीदें लगा ली थीं। उनके मुताबिक आज जब शेयर बाजार की उम्मीदें पूरी नहीं हुईं तो उसके चलते तीखी गिरावट देखने को मिली।

एयरटेल ने ऑनलाइन डेस्कटॉप सेवा शुरू की

दूरसंचार क्षेत्र की निजी कंपनी भारती एयरटेल ने नयी ऑनलाइन डेस्कटॉप सेवा शुरू की है। यह सेवा माइक्रोसॉफ्ट तथा नीवियो की तकनीक पर आधारित है। एयरटेल ब्रॉडबैंड के ग्राहक केवल 99 रुपये प्रति माह अदा करके इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।  हालाँकि इस खबर का कंपनी के शेयर भाव पर कोई सकारात्मक असर नहीं दिख रहा है। पूरे बाजार की दिशा के मुताबिक ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में आज के कारोबार में इसके शेयर भाव में कमजोरी दिख रही है।

बैंकिंग सूचकांक में 4% से अधिक की कमजोरी

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में आज के कारोबार में बैंकिंग क्षेत्र के शेयर में कमजोरी का रुख है। आज दोपहर 2.04 बजे बैंकिंग सूचकांक में 4.64% की कमजोरी है। इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा कमजोरी ऐक्सिस बैंक के शेयर भाव में है, जो 6% की गिरावट के साथ 412.00 पर है। आईसीआईसीआई बैंक में 5.7% एसबीआई  में 4.8%, पंजाब नेशनल बैंक में 4.7%, आईडीबीआई बैंक में 4.7% और बैंक ऑफ इंडिया में 4.6% की कमजोरी है। 

रियल्टी क्षेत्र के शेयर लढ़के

आज अंतरिम बजट पेश होने के बाद रियल्टी क्षेत्र के शेयरों में गिरावट का रुख है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में आज के कारोबार में दोपहर 1.46 बजे रियल्टी सूचकांक में 4% की कमजोरी है। इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा कमजोरी इंडियाबुल्स रियल के शेयर भाव में है, जो 7.9% की गिरावट के साथ 100.50 पर है। यूनिटेक में 5.6% अंसल इन्फ्रा में 5%, एचडीआईएल में 4.6%, डीएलएफ में 3.9% और ऑर्बिट कॉर्पोरेशन में 1.8% की कमजोरी है। 

सरकारी घाटे को नजरअंदाज करना बेवकूफी: कवि

इस अंतरिम बजट में सरकारी खजाने का घाटा (फिस्कल डेफिसिट) बढ़ कर 6% होने के अनुमान ने कई बाजार विश्लेषकों की चिंता को बढ़ा दिया है। मल्टीपल एक्स कैपिटल के सीईओ कवि कुमार का कहना है कि यह चेतावनी की घंटी है, क्योंकि इसमें अगर राज्य सरकारों के घाटे को भी मिला दें, तो कुल मिला कर जीडीपी के 11-12% के बराबर घाटा होता है। उनके मुताबिक यह ज्यादा चिंता की बात इसलिए है कि केवल सितंबर के बाद से धीमापन आने का इतना तीखा असर दिख रहा है।

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