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एशियाई शेयर बाजारों में हरियाली, यूरोपीय बाजारों में तेजी

कारोबोरी हफ्ते के पहले दिन एशियाई शेयर बाजारों ने अच्छी तेजी दर्ज की। चीन के शंघाई कंपोजिट सूचकांक ने 3.57% की बढ़त दर्ज की। हांगकांग के हैंग सेंग सूचकांक में 8.66% की बढ़त दर्ज की।

रियल्टी क्षेत्र में 7.4% की तेजी

बीएसई के रियल्टी सूचकांक में आज सबसे ज्यादा तेजी है। दोपहर के 1.30 बजे इसके सूचकांक में 7.4% की मजबूती है। इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा यूनिटेक 3.15 रुपये या 10.23% की बढ़त के साथ 33.95 रुपये पर है।

सरकारी पैकेजः कुछ करना था, इसलिए...

राजीव रंजन झा

सरकारी पैकेज आखिरकार आ गया। शनिवार को लाने की बात थी, थोड़ा टला और रविवार को आया। कुल मिलाकर सरकार ने सोचा-विचारा ज्यादा, किया कम। सरकारी उपायों की घोषणा करने वाले योजना आयोग उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने यह बात तो ठीक कही कि 7% विकास दर की संभावना दिखने की वजह से हम आत्मसंतुष्ट नहीं हो सकते, इसलिए विकास दर को कम कर सकने वाली समस्याएँ सामने आने से पहले हम कदम उठाना चाहते हैं। लेकिन फिलहाल जो कदम उन्होंने सामने रखे हैं, वे पहाड़ जैसी समस्या के सामने राई जितने हैं।

पैकेज अच्छा है, पर थोड़ा है

गुल टेकचंदानी, निवेश सलाहकार

सरकार का आर्थिक पैकेज सही दिशा में है, लेकिन इसकी मात्रा पर बहस हो सकती है। मेरा मानना है कि यह काफी कम है। शायद सरकार को उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में ज्यादा कटौती करनी चाहिए थी।

अमेरिकी बाजारों में तेजी, आज एशिया भी उछला

शुक्रवार को बेहद कमजोर शुरुआत करने के बाद अमेरिकी शेयर बाजारों ने काफी तेज वापसी की और आखिरकार डॉव जोंस में 3% की मजबूती रही। आज सुबह एशियाई बाजारों में भी जबरदस्त तेजी का रुख है।

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निवेश मंथन पत्रिका

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    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

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    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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