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एमएसएमई क्षेत्र को बजट में मिला प्रोत्साहन, 10,000 करोड़ एमएसएमई ग्रोथ फंड बनेगा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए एमएसएमई (MSME) और एसएमई क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ कीं। एमएसएमई को अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए वित्त मंत्री ने चैंपियन एमएसएमई (champion MSMEs) बनाने के लिए तीन-आयामी दृष्टिकोण (three-pronged approach) अपनाने की बात कही।

प्रमुख घोषणाएँ एमएसएमई/एसएमई क्षेत्र के लिए :

₹10,000 करोड़ एमएसएमई ग्रोथ फंड (MSME Growth Fund) की स्थापना : यह फंड भविष्य के चैंपियन एमएसएमई बनाने के लिए समर्पित है। चुनिंदा मानदंडों (select criteria) के आधार पर उद्यमों को प्रोत्साहित किया जायेगा, जिससे इक्विटी पूँजी (equity support) उपलब्ध होगी और वे बड़े पैमाने पर विस्तार कर सकेंगे। इससे रोजगार सृजन और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।

सेल्फ-रिलायंट इंडिया फंड के लिए अतिरिक्त राशि : 2023 में घोषित आत्मनिर्भर भारत फंड (सेल्फ-रिलायंट इंडिया फंड) को ₹4,000 करोड़ की अतिरिक्त राशि (Top Up) प्रदान की जायेगी। इसमें से, उन्होंने खास तौर पर सूक्ष्म उद्यमों (माइक्रो एंटरप्राइज) के लिए 2,000 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया। यह फंड 2023 में उन एमएसएमई में 50,000 करोड़ रुपये की इक्विटी फंडिंग डालने के लिए घोषित किया गया था, जिनमें बड़ी इकाई बन पाने की क्षमता और संभावना है।

तरलता समर्थन के लिए ट्रेड्स (TReDS) प्लेटफॉर्म : ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) को मजबूत बनाया जायेगा। केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (central public sector enterprises) द्वारा एमएसएमई से खरीदारी के लिए TReDS को अनिवार्य ट्रांजेक्शन प्लेटफॉर्म बनाया जायेगा। इससे एमएसएमई को बेहतर तरलता (liquidity support) मिलेगी और उनके बकाया भुगतान समय पर प्राप्त होंगे। पहले से ही TReDS के माध्यम से ₹7 लाख करोड़ से अधिक की तरलता उपलब्ध करायी जा चुकी है, और अब इसे और प्रभावी बनाने के उपाय प्रस्तावित हैं।

कॉर्पोरेट मित्र (Corporate Mitras) कैडर का विकास: पेशेवर संस्थानों जैसे आईसीएआई (ICAI), आईसीएमएआई (ICMAI) और आईसीएसआई (ICSI) के साथ मिल कर शॉर्ट-टर्म मॉड्यूलर कोर्स और प्रैक्टिकल टूल्स डिज़ाइन किये जायेंगे। इससे दूसरी श्रेणी (टियर-2) और तीसरी श्रेणी (टियर-3) शहरों में कॉर्पोरेट मित्र (para-professionals) तैयार होंगे, जो एमएसएमई को नियामक अनुपालन (regulatory compliance) सस्ती दरों पर पूरा करने में मदद करेंगे। यह एमएसएमई के लिए अनुपालन बोझ कम करने और व्यावसायिक सहायता बढ़ाने का महत्वपूर्ण कदम है।

ये घोषणाएँ एमएसएमई क्षेत्र को इक्विटी, तरलता और क्षमता निर्माण के माध्यम से मजबूत बनाने पर केंद्रित हैं, जो भारत की आर्थिक वृद्धि और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। बजट में एमएसएमई को चैंपियन बनाने को छह प्रमुख क्षेत्रों में से एक बताया गया है। (शेयर मंथन, 1 फरवरी 2026)

 

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