सोना और चाँदी में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों के साथ-साथ कस्टम ड्यूटी भी एक बड़ा जोखिम बन सकती है।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि मौजूदा घरेलू कीमतों में आयात शुल्क (Import Duty) का असर शामिल है। यदि भविष्य में सरकार आयात शुल्क में कटौती करती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिना किसी बड़ी गिरावट के भी घरेलू कीमतों में तेज कमी आ सकती है। ऐसे में निवेशकों को केवल मौजूदा भाव देखकर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए, बल्कि इस अतिरिक्त जोखिम को भी ध्यान में रखना चाहिए।
चाँदी की बात करें तो विशेषज्ञ फिलहाल इसमें भी जल्दबाजी के पक्ष में नहीं हैं। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में 50 डॉलर प्रति औंस के आसपास का स्तर चांदी के लिए अहम सपोर्ट माना जा सकता है। यदि कीमतें इस स्तर तक आती हैं, तब चरणबद्ध खरीदारी शुरू की जा सकती है। फिलहाल सोना और चांदी दोनों में निवेशकों को एसआईपी या छोटे-छोटे हिस्सों में निवेश की रणनीति अपनानी चाहिए। इससे बाजार में आने वाली अस्थिरता का असर कम होगा और लंबे समय में बेहतर औसत खरीद मूल्य हासिल किया जा सकेगा।
(शेयर मंथन, 04 अगस्त 2026)
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