एक्सपर्ट से जानें चाँदी में इतनी तेजी क्यों आई है, निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?
चाँदी को लेकर वैश्विक स्तर पर जिस तरह की चर्चाएँ चल रही हैं, उसमें चीन की भूमिका सबसे अहम बनकर सामने आ रही है।
चाँदी को लेकर वैश्विक स्तर पर जिस तरह की चर्चाएँ चल रही हैं, उसमें चीन की भूमिका सबसे अहम बनकर सामने आ रही है।
कमोडिटी बाजार में इस समय जो हलचल दिख रही है, वह असाधारण है। सोने और चांदी दोनों ने नई ऊंचाइयों को छू लिया है।
बजट से पहले बाजार में बनने वाली पारंपरिक तेजी इस बार थोड़ी कमजोर दिखाई दे रही है। आमतौर पर बजट से पहले निवेशक किसी बड़े ऐलान की उम्मीद में पोज़िशन बनाते हैं, लेकिन इस बार माहौल अलग है।
अमेरिकी बाजारों में हालिया उतार-चढ़ाव ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। हालांकि यह गिरावट फिलहाल एक सामान्य करेक्शन जैसी दिखती है। जियोपॉलिटिकल तनावों से डर जरूर बना है, लेकिन लंबे और बड़े युद्ध की संभावना कम मानी जा रही है, खासकर अमेरिका के बढ़ते कर्ज को देखते हुए।
इस हफ्ते शेयर बाजार में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। हफ्ते की शुरुआत में तेज गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, हालांकि बाजार ने काफी हद तक खुद को संभाला।
निफ्टी का फिसलना जारी है और यह 25,000 के पास आ गया है। अब नये सप्ताह में शेयर बाजार की चाल कैसी रहेगी? बाजार की कमजोरी में निवेशक कहाँ सावधान रहें और कहाँ निवेश के अच्छे अवसरों पर नजर रखें? यह सब समझने के साथ-साथ शेयरों के बारे में अपने सवाल पूछने के लिए जुड़ें बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार के साथ शनिवार, 24 जनवरी 2026 को हो रहे निवेश मंथन के इस लाइव वेबिनार में।
पीपीएफएस म्यूचुअल फंड अपने नए लार्ज कैप एनएफओ के जरिए उन निवेशकों को टारगेट कर रहा है, जो लार्ज कैप यूनिवर्स का व्यापक एक्सपोज़र चाहते हैं लेकिन अत्यधिक एक्टिव मैनेजमेंट का जोखिम नहीं लेना चाहते।
मिड कैप इंडेक्स की मौजूदा संरचना काफी हद तक निफ्टी जैसी बनती दिख रही है। मिड कैप फिलहाल कंसोलिडेशन मोड में है और किसी भी निर्णायक ब्रेकआउट के लिए मजबूत ट्रिगर की जरूरत है।
आईटी सेक्टर में हालिया नतीजों के बाद निफ्टी आईटी इंडेक्स में जो मजबूती दिखी है, उसने बाजार में एक नई उम्मीद जरूर जगाई है।
इन्फोसिस के नतीजों के बाद IT सेक्टर में जो उत्साह देखने को मिला, उसकी सबसे बड़ी वजह कंपनी की ग्रोथ गाइडेंस रही।
विप्रो का ताजा रिजल्ट कुल मिलाकर ठीक-ठाक कहा जा सकता है। बाजार में पहले से ही यह धारणा बनी हुई थी कि यह क्वार्टर बहुत मजबूत नहीं रहेगा, इसलिए एक्सपेक्टेशंस काफी म्यूटेड थीं।
लगभग एक दशक से भारतीय शेयर बाजार में तेजी के कई दौर देख चुके निवेशकों के लिए आने वाला समय उत्साह और सावधानी- दोनों का मिश्रण लेकर आ सकता है।
भारतीय शेयर बाजार इस समय अपने ऐतिहासिक उच्च स्तरों के आसपास कारोबार कर रहा है, लेकिन इस तेजी का लाभ सभी निवेशकों को समान रूप से नहीं मिला है।
एंबिट एसेट मैनेजमेंट के मुख्य परिचालन अधिकारी सिद्धार्थ रस्तोगी का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार ने अब तक अपनी अधिकांश कमजोरियों को कीमतों में समाहित कर लिया है।
पिछले दो वर्षों में आईपीओ की तेज रफ्तार और बाजार में बढ़ती भागीदारी के बीच निवेशकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सही शेयर चुनने की है।
जब बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है, तब कुछ निवेशक सतर्क हो जाते हैं और कुछ अवसर तलाशने लगते हैं। स्वतंत्र विश्लेषक अरविंद पृथी खुद को दूसरे वर्ग में रखते हैं।