सोयाबीन वायदा (जुलाई) की कीमतों में 3,720 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 3,600 रुपये तक गिरावट हो सकती है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार से नरमी के संकेतों पर सोयाबीन वायदा (अक्टूबर) की कीमतें 3,880 रुपये तक गिरावट दर्ज कर सकती है।
सोयाबीन वायदा (अक्टूबर) की कीमतों के नरमी के रुझान के साथ 3,850-3,800 रुपये के स्तर पर पहुँचने की संभावना है।
सोयाबीन वायदा (नवम्बर) की कीमतों के 4,050-4,150 रुपये के दायरे में सीमित कारोबार करने कीसंभावना है।
हल्दी वायदा (नवंबर) की कीमतें यदि 5,760 रुपये से नीचे टूटती है तो 5,700 रुपये तक लुढ़क सकती हैं।
कपास वायदा (अप्रैल) की कीमतों के तेजी रुझान के साथ 945-950 के स्तर पर पहुँचने की संभावना है।
कपास उद्योग की ओर से लगातार माँग के कारण कपास वायदा (अप्रैल) की कीमतों के 925-935 रुपये के दायरे में कारोबार कर सकती है।
कपास वायदा (अप्रैल) की कीमतों को 920 रुपये के स्तर पर रेजिस्टेंस रहने की संभावना है।
एसएमसी कमोडिटी (SMC Commodity) ने अपनी साप्ताहिक रिपोर्ट में एनसीडीईएक्स में ग्वारगम (जनवरी) को खरीदने की सलाह दी है।
कॉटन वायदा (अक्टूबर) की कीमतों के तेजी के रुझान के साथ 19,250-19,500 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है।
कॉटन वायदा (अक्टूबर) की कीमतों के तेजी के रुझान के साथ 19,500-20,000 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है।
कॉटन वायदा (नवम्बर) की कीमतों के 19,400-19,800 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है।
कॉटन (मार्च) कॉन्टैंक्ट की कीमतों के 21,190-21,350 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है। घरेलू वायदा के साथ-साथ प्रमुख कपास मंडियों में घरेलू कपास की हाजिर दरों में वृद्धि हुई है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार के तर्ज पर एमसीएक्स में कॉटन वायदा की कीमतें दो साल के उच्च स्तर 21,720 रुपये पर पहुँच गयी है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार के तर्ज पर एमसीएक्स में कॉटन वायदा की कीमतें दो साल के उच्च स्तर 21,650 रुपये पर पहुँच गयी है।
कॉटन वायदा (फरवरी) की कीमतों में तेजी का रुझान है और कीमतें 21,400-21,500 रुपये के स्तर पर पहुँच सकती हैं।
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मार्च के शुरुआती 3 सप्ताहों में भारतीय शेयर बाजार 8% से ज्यादा टूट चुका है। और यह गिरावट एक ऐसे युद्ध के चलते आयी है, जिसमें हमारा कोई लेना-देना नहीं है।
अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।