शेयर मंथन में खोजें

मई में आईईएक्स (IEX) के ट्रेड वॉल्यूम में 8 फीसदी की बढ़ोतरी

मई में इंडियन एनर्जी एक्सचेंज यानी आईईएक्स (IEX) के ट्रेड वॉल्यूम में 8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। ट्रेड वॉल्यूम 8 फीसदी बढ़कर 8251 मिलियन इकाई हो गई है। औसत स्पॉट पावर प्राइस मई 2023 में 2022 के मुकाबले 30 फीसदी कम था। पिछले साल 2022 में जहां दर 6.76 रुपये प्रति इकाई थी तो वहीं 2023 में 4.74 रुपये प्रति इकाई रही।

 दरों में कमी की वजह आपूर्ति से जुड़े स्थिति में सुधार, लिक्विडिटी में बढ़ोतरी और ठंडा मौसम रहा। इंडियन एनर्जी एक्सचेंज की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि मई में कुल वॉल्यूम 8251 मिलियन इकाई रहा। इसमें ग्रीन मार्केट में 358 मिलियन इकाई की ट्रेडिंग, 1.42 लाख आरईसी (REC) जो कि 142 मिलियन के बराबर है। ऐसी उम्मीद है कि पावर की मांग आगे आने वाले महीने में बढ़ने वाली है। कोयले की आपूर्ति, इलेक्ट्रॉनिक नीलामी में कोयले की कीमतों में कमी, लगातार आयातित कोयले में कमी और गैस कीमतों में कमी से सप्लाई में सुधार देखने को मिलेगी। इससे कीमतों के ज्यादा प्रतिस्पर्धात्मक होने की उम्मीद है। बिजली वितरण कंपनियों को ज्यादा मंजूरी मिलने की उम्मीद है।

आईईएक्स (IEX) ने 1 जून से टर्शियरी रिजर्व एंसिलियरी सर्विसेज यानी ट्रास (TRAS) मार्केट सेगमेंट के लिए शुरू है। यह डे एहेड मार्केट एंसिलियरी सर्विसेज (DAM-AS) और रियल टाइम मार्केट एंसिलियरी सर्विसेज यानी (RTM-AS) के लिए शुरू की गई है। डे एहेड मार्केट यानी डीएएम (DAM) वॉल्यूम 3,224 मिलियन इकाई से बढ़कर 4,066 मिलियन इकाई तक पहुंच गया है। इसमें 26 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई है। मई के लिए औसत मार्केट क्लीयरिंग प्राइस 4.74 रुपये प्रति इकाई रही है जो कि पिछले महीने के मुकाबले 30 फीसदी कमी है।

 

(शेयर मंथन 6 जून, 2023)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख