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विदेशी मुद्रा के मोर्चे पर 2016 के गर्भ में क्या है

आनंद राठी फाइनेंशियल सर्विसेज के प्रबंध निदेशक आमित राठी ने वर्ष 2016 में विदेशी मुद्रा भंडार के बारे में अनुमान लगाते हुए कहा है कि भारत का व्यापार घाटा 10 अरब डॉलर के मासिक औसत दायरे में बने रहने की संभावना है।

अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर 2016 के गर्भ में क्या है

आनंद राठी फाइनेंशियल सर्विसेज के प्रबंध निदेशक आमित राठी ने वर्ष 2016 में बाजार के बारे में अनुमान लगाते हुए कहा है कि भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में एक बना रहेगा।

मैट्रीमोनी.कॉम को आईपीओ लाने की अनुमति मिली

भारतमैट्रीमोनी.कॉम समेत विवाह संबंधी विभिन्न वेबसाइट संपत्तियों की स्वामी मैट्रीमोनी.कॉम को पूँजी बाजार में अपना पहला सार्वजनिक इश्यू (आईपीओ) पेश करने के लिए सेबी की अनुमति मिल गयी है।

शीर्ष उद्योग संगठनों ने की जीएसटी की राह की अड़चनें दूर करने की अपील

अखिल भारतीय व्यापार परिसंघ के जरिये फिक्की, सीआईआई, एसोचैम और पीएचडीसीसीआई समेत पूरे भारतीय उद्योग जगत ने माल एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू कराने के उद्देश्य से सभी राजनीतिक दलों से लंबे समय से लटके संविधान संशोधन विधेयक को संसद के चालू सत्र में पारित किये जाने के लिए एक स्वर में स्पष्ट अपील की है ताकि खेल बदलने वाले कर सुधार उपायों को जल्द से जल्द अमल में लाया जा सके।

नवंबर में दोगुनी हुई खाद्य महँगाई दर

नवंबर माह में थोक महँगाई दर (डब्लूपीआई) और खाद्य महँगाई दर बढ़ गयी है। हालाँकि थोक महँगाई दर अभी भी ऋणात्मक बनी हुई है।

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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