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महँगाई को नियंत्रित नहीं कर पायेः प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्वीकार किया है कि उनके कार्यकाल में रोजगार के पर्याप्त मौके उत्पन्न नहीं किये जा सके और महँगाई को नियंत्रित नहीं किया जा सका।
साथ ही उन्होंने माना कि भ्रष्टाचार एक मसला है और इससे निबटना आसान नहीं है। खास तौर पर पत्रकारों के लिए बुलायी गयी कांफ्रेंस में उन्होंने यह भी कहा कि पिछले नौ सालों में अर्थव्यवस्था की विकास दर ‘किसी भी नौ साल की अवधि में सबसे अधिक’ रही है। साथ ही उन्होंने जोड़ा कि इस दौरान विकास की प्रक्रिया सबसे अधिक समावेशी भी रही है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार सुधारों की प्रक्रिया को जारी रखेगी।    
प्रधानमंत्री ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लगभग एक दशक के उनके कार्यकाल में सरकार मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में पर्याप्त मौके उत्पन्न करने में असफल रही है। यह हमारे काम का एक ऐसा पहलू है जिसे ठीक करने के लिए हम कड़ी मेहनत कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने जोड़ा, “छोटे और मँझोले उद्यमों को सहारा देने के लिए हमें अधिक प्रयास की जरूरत है क्योंकि ये रोजगार के बेहतर स्रोत हैं।” 
मनमोहन सिंह के अनुसार आर्थिक मोर्चे पर उनकी दूसरी सबसे बड़ी चिंता महँगाई रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि इस दौरान महँगाई की दर अप्रत्याशित रूप से ऊपरी स्तरों पर बनी रही है। उनके अनुसार, “ऊँचे स्तरों पर बरकरार महँगाई को हम अपनी इच्छा के अनुरूप नियंत्रित नहीं कर सके हैं। खाद्य महँगाई में बढ़ोतरी इसकी मुख्य वजह रही है।” लेकिन ऊँची महँगाई दर के कारण बताते हुए उन्होंने यह भी जोड़ा कि हमारी समावेशी नीतियों की वजह से समाज के कमजोर वर्गों के हाथों में अधिक पैसे आये हैं। (शेयर मंथन, 03 जनवरी 2014)

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