शेयर मंथन में खोजें

फिर गिरे अमेरिकी शेयर बाजार, एशिया में बढ़त

अमेरिकी शेयर बाजारों में चल रहा अनिश्चितता का माहौल कल बुधवार को एक बार फिर सामने आया और मंगलवार को 141 अंकों की बढ़त दर्ज करने वाले डॉव जोंस में 121 अंकों की कमजोरी आ गयी। इस तरह यह एक बार फिर 8,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे चला गया। आज गुरुवार की सुबह एशियाई शेयर बाजारों में हरियाली दिख रही है।  

अमेरिका के इन्स्टीट्यूट ऑफ सप्लाई मैनेजमेंट की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी में सेवा क्षेत्र में दिसंबर की तुलना में कम गिरावट आयी। ट्रेड एसोसिएशन ऑफ पर्चेजिंग एक्जेक्यूटिव्स का सूचकांक दिसंबर के 40.1 के मुकाबले जनवरी में 42.9 हो गया। बुधवार की सुबह इन खबरों के बीच मजबूत शुरुआत करने वाला डॉव जोंस कंपनियों की आमदनी के आँकड़े आने के बाद दबाव में आ गया। दिग्गज कंपनी टाइम वार्नर ने साल 2008 की चौथी तिमाही के दौरान 16 अरब डॉलर घाटे की खबर दी। दूसरी ओर क्राफ्ट फूड्स के मुनाफे में अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में 72% की कमी आयी है। सिस्को सिस्टम्स के ऑर्डर में जनवरी में तीखी गिरावट दर्ज की गयी है। इस बीच नाइमेक्स में कच्चे तेल की कीमत 0.46 डॉलर गिर कर 40.32 डॉलर प्रति बैरल पर रही।  
आज गुरुवार की सुबह एशियाई शेयर बाजारों में बढ़त का रुख दिख रहा है। हैंग सेंग और शंघाई कंपोजिट में 1.5-2.5% की मजबूती है। हालाँकि निक्केई, ताइवान वेटेड, कॉस्पी, जकार्ता कंपोजिट और स्ट्रेट्स टाइम्स हरे निशान में हैं, लेकिन इनमें 1% से कम बढ़त है। सिंगापुर स्टॉक एक्सचेंज में निफ्टी वायदा कल एनएसई में निफ्टी के बंद स्तर के लगभग बराबर 2805-10 के आसपास चल रहा है। 

 

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख