आईटी सेक्टर में पिछले कुछ समय से जिस “बॉटमिंग आउट” की प्रक्रिया के संकेत मिल रहे थे, वह अब और स्पष्ट होती दिख रही है।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि खास बात यह रही कि यह स्थिरता युद्धविराम जैसे बड़े वैश्विक घटनाक्रम से पहले ही दिखने लगी थी, जिससे यह संकेत मिलता है कि सेक्टर अपने आंतरिक फैक्टर्स के आधार पर भी मजबूत हो रहा है। ऐसे में निवेशकों के लिए आईटी सेक्टर को एक टैक्टिकल अवसर के रूप में देखने की सलाह पहले से दी जा रही थी। हाल ही में टीसीएस के तिमाही नतीजों ने इस सेक्टर की दिशा को समझने के लिए एक शुरुआती संकेत जरूर दिया है। हालांकि नतीजों में कोई बहुत बड़ा उत्साहजनक आंकड़ा नहीं दिखा, लेकिन स्थिरता के संकेत जरूर मिले हैं। कंपनी ने लगभग 5% के आसपास क्वार्टर-ऑन-क्वार्टर रेवेन्यू ग्रोथ दिखाई है, जो कि ठीक-ठाक है लेकिन बेहद मजबूत नहीं कही जा सकती। इसके साथ ही हेडकाउंट में बढ़ोतरी एक सकारात्मक संकेत है, जो यह दर्शाता है कि कंपनियां भविष्य की मांग, खासकर एआई आधारित सेवाओं के लिए तैयारी कर रही हैं।
दरअसल, अब पूरा आईटी सेक्टर एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सबसे बड़ा फोकस बनता जा रहा है। टीसीएस सहित अन्य आईटी कंपनियां अब अपने एआई रेवेन्यू को लेकर ज्यादा पारदर्शिता दिखाने लगी हैं। आने वाले समय में हर कंपनी एआई से जुड़ी सेवाओं में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश करेगी, क्योंकि यही उनकी प्रतिस्पर्धा में बने रहने का प्रमुख जरिया होगा। हालांकि, यह ट्रांजिशन धीरे-धीरे होगा और अगले 2–3 वर्षों में इसका स्पष्ट प्रभाव देखने को मिलेगा।
इसके बावजूद सबसे बड़ा सवाल अभी भी “वैल्यूएशन बनाम ग्रोथ” का बना हुआ है। मौजूदा ग्रोथ के मुकाबले आईटी कंपनियों के वैल्यूएशन बहुत आकर्षक नहीं लगते। टीसीएस और इंफोसिस जैसी बड़ी कंपनियां अभी 18–19 के पी/ई मल्टीपल पर ट्रेड कर रही हैं, जो कि ऐतिहासिक औसत के हिसाब से ठीक है, लेकिन पहले की तरह 25 प्लस के ऊंचे मल्टीपल को जस्टिफाई करने के लिए ग्रोथ में तेज उछाल जरूरी होगा, जो फिलहाल नजर नहीं आ रहा।
निवेश रणनीति की बात करें तो मौजूदा स्तरों पर आईटी स्टॉक्स में रिस्क-रिवार्ड संतुलन पहले के मुकाबले बेहतर हुआ है। टीसीएस के लिए 2350–2400 का जो हालिया बॉटम बना है, वह एक मजबूत सपोर्ट के रूप में देखा जा सकता है। वर्तमान स्तर से यह दूरी काफी कम है, जिससे टैक्टिकल निवेश के लिए यह एक आकर्षक सेटअप बनता है। हालांकि, ऊपर की तरफ बहुत बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं करनी चाहिए और 10–15% के अपसाइड के बाद स्टॉक्स में वैल्यूएशन का दबाव फिर से आ सकता है।
इसी तरह इंफोसिस का चार्ट भी लगभग समान पैटर्न दिखाता है, जहां एक स्थिर बॉटम बनता नजर आ रहा है और सीमित अपसाइड की संभावना है। कुल मिलाकर आईटी सेक्टर फिलहाल एक “रेंज-बाउंड” मूवमेंट में रह सकता है, जहां नीचे की तरफ मजबूत सपोर्ट और ऊपर की तरफ सीमित रिटर्न का दायरा बना रहेगा। ऐसे में निवेशकों के लिए यह जरूरी है कि वे इसमें लंबी अवधि के बड़े रिटर्न की उम्मीद के बजाय टैक्टिकल और अनुशासित तरीके से निवेश करें।
(शेयर मंथन, 10 अप्रैल 2026) (आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)