शेयर मंथन में खोजें

आईटीसी (ITC), इन्फोसिस (Infosys) ने चढ़ाया सेंसेक्स (Sensex) को

आज सेंसेक्स (Sensex) की बढ़त में सबसे ज्यादा योगदान आईटीसी (ITC), इन्फोसिस (Infosys) और रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) का रहा।

सेंसेक्स को आईटीसी से 27 अंक, इन्फोसिस से 26 अंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज से 22 अंक की बढ़त हासिल हुई। इसके अलावा एचडीएफसी बैंक ने 9 अंक और एसबीआई ने भी 6 अंक का योगदान किया। सेंसेक्स के कुल 21 शेयर आज फायदे में रहे, जबकि 9 शेयर लाल निशान में रहे। इसे आईसीआईसीआई बैंक ने 23 अंक की चपत लगायी।
सेंसेक्स के इन शेयरों का अपना नफा-नुकसान देखें, तो सबसे ज्यादा फायदे में हीरो होंडा का शेयर रहा। यह 42.25 रुपये यानी 2.75% की तेजी के साथ 1577.15 रुपये पर आ गया। आईटीसी को 2.62%, डीएलएफ को 2.32% और जयप्रकाश एसोसिएट्स को 2.27% का फायदा हुआ। एनटीपीसी में 1.47%, इन्फोसिस में 1.40% और रिलायंस इंडस्ट्रीज में 1.07% की तेजी रही। एचडीएफसी बैंक में 0.98%, जिंदल स्टील में 0.94%, टाटा पावर में 0.93%, टाटा पावर में 0.93%, मारुति सुजुकी में 0.87%, रिलायंस कम्युनिकेशंस में 0.70%, भारती एयरटेल में 0.66%, टाटा स्टील में 0.61%, एसबीआई में 0.60%, बीएचईएल में 0.51%, हिंदुस्तान यूनिलीवर में 0.46%, रिलायंस इन्फ्रा में 0.43%, स्टरलाइट इंडस्ट्रीज में 0.36% और ओएनजीसी में 0.30% की मजबूती रही। महिंद्रा एंड महिंद्रा 0.03% की मामूली बढ़त के साथ सपाट रहा। दूसरी ओर, सिप्ला को 2.95%, एचडीएफसी को 2.07% और विप्रो को 2.05% का घाटा सहना पड़ा। हिंडाल्को इंडस्ट्रीज में 1.96%, लार्सन एंड टुब्रो में 1.87%, आईसीआईसीआई बैंक में 1.63%, टीसीएस में 1.40%, बजाज ऑटो में 0.74% और टाटा मोटर्स में 0.32% की गिरावट रही। (शेयर मंथन, 07 फरवरी 2011)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख