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क्या सोना-चांदी में अब भी एंट्री करनी चाहिए या बड़ी गिरावट का इंतजार करें?

सोना और चांदी में हाल के महीनों में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। पहले तेज़ी के दौर में निवेशकों ने तेजी से पैसा लगाया और कुछ ही महीनों में 40-50% तक के रिटर्न भी मिले।

ट्रेड स्क्रिप्ट ब्रोकिंग के निदेशक संदीप जैनकहते है कि अचानक आई तेज गिरावट ने बाजार की धारणा बदल दी और कई निवेशकों के होश ठिकाने लगा दिए। अब एक बार फिर से भाव संभलते दिख रहे हैं। सोना लगभग 1,61,000 के आसपास और चांदी करीब 92,000–93,000 के दायरे में स्थिर होती नजर आ रही है (एमसीएक्स भाव के संदर्भ में)। गिरावट के बाद बना यह कंसोलिडेशन संकेत देता है कि बाजार फिलहाल एक नया बेस बनाने की कोशिश कर रहा है।

बड़ी गिरावट के बाद एसेट क्लास आकर्षक लगने लगते हैं, क्योंकि ऊंचे स्तर से सस्ते भाव पर मिलना निवेशकों को लुभाता है। यही कारण है कि फिर से एक्सपोज़र बढ़ाने का विचार कई लोगों के मन में आ सकता है। हालांकि यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि पहले जो शार्प सेल-ऑफ आया था, वैसा दूसरा झटका तुरंत आए, इसकी संभावना फिलहाल कम दिखती है। चार्ट स्ट्रक्चर में स्थिरता के संकेत हैं, लेकिन सेंट्रल बैंकों की खरीद पहले जैसी आक्रामक नहीं दिख रही, जो आगे की तेजी को सीमित भी कर सकती है।

रणनीति के तौर पर समझदारी यह है कि भावनाओं या FOMO (Fear of Missing Out) में आकर दोबारा एंट्री न लें। सोने में यदि 20–25% की और गिरावट मिलती है तो वह लंबी अवधि के लिए बेहतर अवसर बन सकता है। चांदी में फिलहाल ज्यादा जोखिम दिखता है, इसलिए सतर्क रहना ही उचित है। कुल मिलाकर, सोना-चांदी में अभी धैर्य की रणनीति ज्यादा उपयुक्त है—तेजी के पीछे भागने के बजाय बेहतर स्तरों का इंतजार करना समझदारी भरा कदम होगा।


(शेयर मंथन, 28 फरवरी 2026)

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