शेयर मंथन में खोजें

मुहुर्त कारोबार में सेंसेक्स नये रिकॉर्ड स्तर पर

भारतीय शेयर बाजार ने संवत 2070 का आरंभ एक नये शिखर को चूमने के साथ किया और दीपावली के दिन 3 अक्टूबर 2013 को मुहुर्त कारोबार में बीएसई का सेंसेक्स (Sensex) 21,322 के नये रिकॉर्ड पर नजर आया।  

मुहुर्त कारोबार के अंत में इसका बंद स्तर 43 अंक की बढ़त के साथ 21,239 का रहा, यानी इसमें 0.20% की हल्की बढ़त रही। एनएसई का निफ्टी (Nifty) भी मुहुर्त कारोबार शुरू होते ही 6343 तक चढ़ा और अंत में 0.16% या 10 अंक की हल्की बढ़त के साथ 6,317 पर बंद हुआ। अभी निफ्टी ने जनवरी 2008 का ऐतिहासिक शिखर 6,357 पार नहीं किया है। 

छोटे-मँझोले सूचकांकों ने मुहुर्त कारोबार में ज्यादा अच्छा प्रदर्शन किया। सीएनएक्स मिडकैप में 0.70% की बढ़त दर्ज की गयी। बीएसई मिडकैप ने 1.05% और बीएसई स्मॉलकैप ने 1.35% की बढ़त हासिल की। ज्यादातर क्षेत्रों के शेयरों ने मजबूती का रुझान दिखाया। क्षेत्रीय सूचकांकों में पीएसयू सूचकांक ने सबसे ज्यादा 0.78% की तेजी दिखायी। हेल्थकेयर (0.77%) और ऑटो (0.75%) सूचकांक भी लगभग उतना ही चढ़े। 
सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी टाटा मोटर्स (1.74%), जिंदल स्टील (1.13%), सन फार्मा (0.95%), मारुति सुजुकी (0.86%), टाटा पावर (0.85%), बीएचईएल (0.84%), टाटा स्टील (0.82%), हिंडाल्को (0.74%) और ओएनजीसी (0.73%) में रही। दूसरी ओर महिंद्रा ऐंड महिंद्रा (-0.52%) और एचडीएफसी बैंक (-0.43%) कमजोर नजर आये। एलऐंडटी (0.26%), भारती एयरटेल (0.25%), एचडीएफसी (0.25%) और आईसीआईसीआई बैंक (0.25%) भी थोड़े दबाव में रहे। (शेयर मंथन, 04 अक्टूबर 2013)

 

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख