शेयर मंथन में खोजें

नये हफ्ते की कमजोर शुरुआत, सेंसेक्स (Sensex) फिर फिसला

पिछले हफ्ते लगातार कमजोर रहने के बाद भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक नये हफ्ते के पहले दिन भी लाल निशान में ही रहे। सुबह सुस्त एशियाई संकेतों के बीच नरमी के साथ शुरुआत करने के बाद बीएसई के सेंसेक्स (Sensex) और एनएसई के निफ्टी (Nifty) दोपहर तक गिरावट बढ़ती गयी।

निफ्टी कुछ देर के लिए 8,000 के नीचे भी चला गया। दो बजे के बाद सेंसेक्स ने 26,378 का और निफ्टी ने 7,996 का निचला स्तर छुआ। हालाँकि आखिरी घंटे में ये दोनों ही सँभले और इनकी गिरावट कुछ कम हुई, पर ये हरे निशान में नहीं आ सके।
कारोबार के समापन पर सेंसेक्स 98 अंक या 0.37% नीचे बंद हुआ। निफ्टी भी अंत में 15 अंक या 0.19% नीचे 8,051 पर रहा। छोटे-मँझोले सूचकांकों को देखें तो बीएसई मिडकैप हरे निशान में लौट आया और 0.08% की काफी हल्की बढ़त पर बंद हुआ। पर बीएसई स्मॉलकैप में 0.20% की कमजोरी रही। एनएसई में सीएनएक्स मिडकैप ने 0.24% और सीएनएक्स स्मॉलकैप ने 0.19% की सुस्ती दिखायी।
सेंसेक्स के दिग्गज शेयरों में बजाज ऑटो अक्टूबर की मासिक बिक्री के आँकड़ों से उपजी निराशा के चलते सबसे कमजोर रहा और 4.61% गिर कर बंद हुआ। हिंडाल्को (-3.69%), टाटा स्टील (-3.28%), वेदांत (-3.10%), एचडीएफसी (-2.80%) और सन फार्मा (-2.64%) सेंसेक्स के अन्य सबसे कमजोर शेयर रहे। दूसरी ओर महिंद्रा ऐंड महिंद्रा अक्टूबर महीने में अच्छी बिक्री की खबर के चलते सेंसेक्स का सबसे तेज शेयर रहा और 2.25% चढ़ कर बंद हुआ। कोल इंडिया में 1.59%, रिलायंस में 1.19%, मारुति सुजुकी में 1.05%, आईसीआईसीआई बैंक में 0.83% और आईटीसी में 0.76% की बढ़त दर्ज हुई। (शेयर मंथन, 02 नवंबर 2015)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख