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टीसीएस (TCS) के तिमाही नतीजे : बाजार खुश हुआ

राजीव रंजन झा : टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (Tata Consultancy Services) के तिमाही नतीजों ने निश्चित रूप से बाजार को खुश किया है और आज सुबह इसके शेयर भावों में बाजार की खुशी झलक रही है।

बाजार को संभवत: टीसीएस के प्रबंधन का आत्मविश्वास सबसे ज्यादा पसंद आ रहा है। बेशक, यह पहली तिमाही है जब टीसीएस ने मुनाफेदारी के पैमाने पर भी इन्फोसिस (Infosys) को स्पष्ट रूप से पछाड़ दिया है। आईएफआरएस आँकड़ों के आधार पर इसका ऑपरेटिंग मार्जिन 26.8% रहा है, जो इन्फोसिस की तुलना में 0.50% अंक ज्यादा है। पहली कतार की सभी आईटी कंपनियों में अब टीसीएस का मार्जिन सबसे अच्छा दिख रहा है।
टीसीएस की तुलना में इन्फोसिस प्रबंधन और रणनीति दोनों मोर्चों पर दुविधा में दिखती है। आज ही इकोनॉमिक टाइम्स ने इन्फोसिस के अमेरिकी कारोबार के प्रमुख अशोक वेमुरी की यह टिप्पणी छापी है कि उसकी प्रतिस्पर्धी कंपनियाँ कामकाज झपटने की होड़ में कीमतें कम रखने के खेल में उतर गयी हैं। अशोक वेमुरी एक तरफ इसे मूर्खों का खेल बता रहे हैं, दूसरी तरफ यह भी कह रहे हैं कि जरूरत होने पर इन्फोसिस भी इस खेल में उतर सकती है।
यह पता नहीं कि अशोक वेमुरी कीमतें घटाने के खेल में उतरने की बात टीसीएस के संदर्भ में कह रहे हैं या अन्य प्रतिस्पर्धी कंपनियों के बारे में। अगर बात टीसीएस के संदर्भ में है तो कीमतों के युद्ध में उतरने के बावजूद मार्जिन बढ़ाने की टीसीएस की कला थोड़ी उन्हें भी सीखनी चाहिए! अगर वे कीमतें घटाने के खेल का जिक्र बाकी कंपनियों के बारे में कर रहे हैं तो बाजार इस समय इन्फोसिस के प्रदर्शन को सीधे-सीधे टीसीएस की कसौटी पर ही देख रहा है। इसलिए इन्फोसिस को यह देखना होगा कि वह न केवल आमदनी में बढ़त की रफ्तार, बल्कि मुनाफेदारी में भी टीसीएस से क्यों पिछड़ गयी है।
इन्फोसिस और बाकी आईटी कंपनियों के प्रदर्शन से यह स्पष्ट है कि आईटी कंपनियों का अपना बाजार इस समय काफी चुनौतियों से भरा है। ऐसे चुनौती भरे वैश्विक माहौल में भी अगर टीसीएस ने दमदार नतीजे सामने रखे हैं तो बाजार निश्चित रूप से इसे सराहेगा। एक तरफ टीसीएस की आमदनी पिछली तिमाही के मुकाबले 5.1% बढ़ी (आईएफआरएस – रुपये में), तो वहीं इन्फोसिस की बढ़त केवल 2.5% और एचसीएल टेक्नोलॉजीज (HCL Technologies) की बढ़त केवल 3% रही। टीसीएस और अन्य कंपनियों की आमदनी में जो बड़ा फर्क है, उसके मद्देनजर वृद्धि दर में यह अंतर काफी मायने रखता है।
टीसीएस भविष्य के बारे में कोई अनुमान नहीं जताती। मेरा तो मानना है कि उसे ऐसा करना चाहिए। मैंने सालों पहले लिखा था कि उसे नतीजे घोषित करने का अपना समय कुछ आगे खिसकाना चाहिए और भविष्य के अनुमान भी पेश करने चाहिए। लेकिन अगर कंपनी की नयी भर्तियों की संख्या देखें तो उससे भी एक संकेत मिल जाता है कि वह आगे के लिए क्या सोच रही है। इसने कुल 18,654 नये कर्मचारियों की भर्ती बीती तिमाही के दौरान की। अगर कर्मचारी संख्या में शुद्ध रूप से बढ़ोतरी देखें तो इस तिमाही में 10,531 की वृद्धि की गयी।
टीसीएस की नयी भर्तियों की यह रफ्तार काफी आक्रामक है। इसने मौजूदा कारोबारी साल में 50,000 कुल नयी भर्तियों का लक्ष्य रखा था। इस लक्ष्य का दो तिहाई हिस्सा तो वह आधे साल में ही पूरा कर चुकी है। यदि उसे अपना बाजार इतना ही चुनौती भरा और अनिश्चित लगता, जितना बाकी कंपनियों के प्रबंधन की बातों से झलकता है, तो वह नयी भर्तियों के मामले में इतनी आक्रामक नहीं होती।
नये ग्राहक बनाने के मोर्चे पर भी वह आक्रामक ढंग से बढ़ रही है। इसने बीती तिमाही में 41 नये ग्राहक बनाये, जो पिछली तिमाही के 29 नये ग्राहकों की तुलना में काफी अच्छी संख्या है। दूसरी ओर इन्फोसिस ने बीती तिमाही में 39 नये ग्राहक बनाये, जो पिछली 5 तिमाहियों की सबसे छोटी संख्या है। बात 41 बनाम 39 की नहीं है। बात यह है कि टीसीएस पहले से ज्यादा आक्रामक वृद्धि दर्ज कर रही है, जबकि इन्फोसिस धीमी पड़ती दिख रही है।
सवाल यह है कि शेयर बाजार में इन दोनों शेयरों को लेकर आपकी रणनीति क्या होनी चाहिए? कई विश्लेषक एक को छोड़ कर दूसरे को पसंद करने की रणनीति पर चलते रहे हैं। मेरे विचार से आपके निवेश पोर्टफोलिओ में इन दोनों की जगह होनी चाहिए, लेकिन पोर्टफोलिओ में इनकी हिस्सेदारी घटाने-बढ़ाने को लेकर ज्यादा सतर्क ढंग से रणनीति बनानी चाहिए। अभी टीसीएस का शेयर बाजार में कुछ समय तक इन्फोसिस से बेहतर प्रदर्शन करते रह सकता है। इसलिए छोटी अवधि के लिहाज से टीसीएस पर दाँव लगाया जा सकता है। लेकिन जैसे-जैसे टीसीएस और इन्फोसिस के बीच मूल्यांकन का फर्क बढ़ता जाये, वैसे-वैसे इन्फोसिस में रणनीतिक खरीदारी पर जोर देना चाहिए। इन्फोसिस देर-सबेर जब भी अपनी उलझनों से बाहर निकलेगी, इसका शेयर भी मूल्यांकन के फासले को खत्म करने की कोशिश में ज्यादा तेज उछाल दिखायेगा। Rajeev Ranjan Jha
(शेयर मंथन, 22 अक्टूबर 2012)

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