शेयर मंथन में खोजें

शेयरों पर नजर (Stocks to Watch) : अरबिंदो फार्मा, इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस, एसबीआई, बॉश और कावेरी सीड

खबरों के कारण जो शेयर आज नजर में रहेंगे उनमें अरबिंदो फार्मा, इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस, एसबीआई, बॉश और कावेरी सीड शामिल हैं।

अरबिंदो फार्मा - सेबी ने कंपनी और प्रमोटरों के खिलाफ स्थगन आदेश पारित किया।
आरपीपी इन्फ्रा - कंपनी ने संयुक्त उद्यम साझेदार के साथ मयनमार में 414 करोड़ रुपये का नया ठेका हासिल किया।
मोरपेन लैब्स - सेबी ने कंपनी को 1 साल के लिए सिक्योरिटी बाजार से रोका।
इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस - केयर ने लंबी अवधि की रेटिंग को "केयर एएए" से "केयर एए+" किया।
राणे इंजन - क्रिसिल ने "स्थिर" आउटलुक के साथ लंबी अवधि की रेटिंग क्रिसिल बीबीबी+ और छोटी अवधि की रेटिंग क्रिसिल ए2 की पुष्टि की।
एस्टर डीएम हेल्थकेयर - कंपनी ने बेंगलुरु में एक अस्पताल स्थापित करने के लिए केएलई सोसाइटी के साथ 25-वर्षीय लीज करार किया।
एसबीआई - प्रस्तावित 2-दिवसीय बैंक हड़ताल स्थगित कर दी गयी है।
कावेरी सीड - 24 सितंबर को हुई बैठक में निदेशक मंडल ने 700 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से बायबैक के प्रस्ताव को मंजूरी दी।
इन्फोबीन्स टेक - कंपनी ने अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी के माध्यम से फिलोसोफी ग्रुप का अधिग्रहण किया।
बॉश - बॉश ने 144.6 करोड़ रुपये में पैकेजिंग मशीनरी कारोबार को बेचने के लिए रॉबर्ट बॉश पैकेजिंग टेक्नोलॉजी के साथ करार किया। (शेयर मंथन, 25 सितंबर 2019)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख