शेयर मंथन में खोजें

एचडीएफसी लाइफ का दूसरी तिमाही में मुनाफा 14.8 फीसदी बढ़ा, एपीई 26.7% बढ़ा

लाइफ इंश्योरेंस कंपनी एचडीएफसी लाइफ (HDFC Life) ने दूसरी तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी के मुनाफे में 14.8 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है। कंपनी का मुनाफा 377 करोड़ रुपये से बढ़कर 433 करोड़ रुपये हो गया है।

 कंपनी के नेट प्रीमियम इनकम में 12 फीसदी की वृद्धि हुई है। कंपनी का नेट प्रीमियम इनकम 14,756 करोड़ रुपये से बढ़कर 16,570 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। कंपनी के कुल एपीई में 26.7% की वृद्धि दर्ज हुई है। कंपनी का कुल एपीई (APE) 3045 करोड़ रुपये से बढ़कर 3858 करोड़ रुपये रहा है। रिटेल एपीई 2596 करोड़ रुपये से बढ़कर 3397 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। कंपनी के वीएनबी में 17 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई है। कंपनी के वीएनबी (VNB) यानी वैल्यू ऑफ न्यू बिजनेस 801 करोड़ रुपये से बढ़कर 938 करोड़ रुपये दर्ज हुआ है। कंपनी का वीएनबी मार्जिन 24.3% से बढ़कर 26.3% के स्तर पर रह गया है। कंपनी के न्यू बिजनेस प्रीमियम में 14 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई है। न्यू बिजनेस प्रीमियम 7101 करोड़ रुपये से बढ़कर 8097 करोड़ रुपये हो गया है। कंपनी के व्यक्तिगत एपीई में 31 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई है और यह वित्त वर्ष 2025 की पहली छमाही में 5864 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह नए पॉलिसी की बिक्री में 22 फीसदी की बढ़ोतरी के कारण संभव हो सका है। सॉल्वेंसी रेश्यो 194% से घटकर 181% के स्तर पर आ गया है। दूसरी तिमाही में एसेट अंजडर मैनेजमेंट यानी एयूएम (AUM) 23% बढ़कर 3.25 लाख करोड़ रुपये रहा है। एचडीएफसी लाइफ का शेयर 3.56 फीसदी गिर कर 714.25 रुपये प्रति शेयर पर बंद हुआ।

 

(शेयर मंथन, 15 अक्टूबर 2024)

 

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख