बैंक ऑफ इंडिया म्यूचुअल फंड ने बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर पर केंद्रित अपना नया एनएफओ- बैंक ऑफ इंडिया बैंकिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज फंड पेश किया है।
इस फंड के फंड मैनेजर नीलेश जेठानी हैं, जो पहले से ही बैंक ऑफ इंडिया मल्टीकैप फंड के इक्विटी हिस्से और बैंक ऑफ इंडिया लार्ज कैप फंड के को-फंड मैनेजर हैं। यह फंड ऐसे समय में लॉन्च हुआ है जब बीएफएसआई (BFSI) सेक्टर भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार की धुरी बना हुआ है और कुल मार्केट कैप का लगभग एक-तिहाई हिस्सा इसी सेक्टर से आता है। नीलेश जेठानी के अनुसार, बीएफएसआई सेक्टर ने पिछले 40-50 वर्षों में जबरदस्त विकास और बदलाव देखा है। पहले जहां बैंक ही फाइनेंशियल सिस्टम का केंद्र थे, वहीं समय के साथ एनबीएफसी, माइक्रोफाइनेंस, अफोर्डेबल हाउसिंग फाइनेंस, एमएसएमई लेंडर्स, कैपिटल मार्केट कंपनियां, इंश्योरेंस और हाल के वर्षों में फिनटेक कंपनियां इस इकोसिस्टम का अहम हिस्सा बन गई हैं। खासतौर पर पिछले 10-12 वर्षों में फिनटेक कंपनियों का उभार हुआ है, जिन्होंने पेमेंट सॉल्यूशंस के जरिए बड़े पैमाने पर ग्राहकों को जोड़ा और अब उन्हीं ग्राहकों को लोन, इंश्योरेंस, ब्रोकिंग और वेल्थ मैनेजमेंट जैसे प्रोडक्ट्स क्रॉस-सेल कर रही हैं।
फंड मैनेजर का मानना है कि बीएफएसआई सेक्टर में अभी भी लंबी अवधि की ग्रोथ की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। उदाहरण के तौर पर, भारत में लगभग 80 करोड़ पैन कार्ड जारी हो चुके हैं, लेकिन कैपिटल मार्केट में निवेश करने वाले लोगों की संख्या करीब 11 करोड़ ही है। इसी तरह म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में भी केवल 5.4 करोड़ यूनिक निवेशक हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि सेक्टर अभी भी अंडर-पेनेट्रेटेड है और आगे ग्रोथ का रनवे काफी लंबा है।
पोर्टफोलियो बनाने के लिहाज से यह फंड बेंचमार्क से अलग रणनीति अपनाने की योजना रखता है। जहां निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स में लगभग 70-75% हिस्सा बैंक और एनबीएफसी का होता है, वहीं इस फंड में लगभग 60% लेंडिंग (बैंक व एनबीएफसी) और 40% नॉन-लेंडिंग (कैपिटल मार्केट्स, इंश्योरेंस, एसेट मैनेजमेंट और फिनटेक) का संतुलन रखने की योजना है। लेंडिंग हिस्से में पीएसयू बैंकों को अपेक्षाकृत ज्यादा वेट देने का इरादा है, क्योंकि मौजूदा समय में वे 16-18% के आरओई, मिड-टीन ग्रोथ और आकर्षक वैल्यूएशन पर उपलब्ध हैं। वहीं नॉन-लेंडिंग सेगमेंट को हाई ग्रोथ इंजन के रूप में देखा जा रहा है, जहां कई कंपनियां 30–50% तक आरओई दे रही हैं।
(शेयर मंथन, 15 जनवरी 2026)
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