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बजट से पहले फीकी पड़ी शेयर बाजार की तेजी? क्या बाजार को बड़े सरप्राइज की उम्मीद नहीं

बजट से पहले बाजार में बनने वाली पारंपरिक तेजी इस बार थोड़ी कमजोर दिखाई दे रही है। आमतौर पर बजट से पहले निवेशक किसी बड़े ऐलान की उम्मीद में पोज़िशन बनाते हैं, लेकिन इस बार माहौल अलग है।

वजह साफ है। सरकार और आरबीआई पहले ही कई मोर्चों पर कदम उठा चुके हैं। टैक्स स्लैब में राहत, ब्याज दरों में कटौती, जीएसटी से जुड़े फैसले, ये सारे बड़े हथियार पहले ही इस्तेमाल हो चुके हैं। ऐसे में बाजार को बजट से पहले किसी बड़े सरप्राइज की उम्मीद नहीं दिख रही।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार कहते हैकि निवेशकों की सोच यह बन रही है कि सरकार अब ज्यादा आक्रामक लोकलुभावन घोषणाएं नहीं करेगी, बल्कि फिस्कल बैलेंस पर फोकस रखेगी। यही कारण है कि बजट से पहले की तेज़ी शायद सीमित रहे और असली प्रतिक्रिया बजट वाले दिन या उसके बाद देखने को मिले। हालांकि, यह भी सच है कि बजट पूरी तरह “खाली” नहीं हो सकता। कोई न कोई सुधार जरूर आएगा, और संभावना यही है कि उसका फोकस कंजम्पशन यानी खपत बढ़ाने पर होगा।

सरकार के पास करने के लिए बचा क्या है?

आरबीआई के जरिए जो राहत दी जा सकती थी, वह दी जा चुकी है। जीएसटी काउंसिल के स्तर पर भी कई अहम फैसले पहले ही हो चुके हैं। पिछले बजट में इनकम टैक्स छूट की सीमा को 12 लाख तक बढ़ाया गया था। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या सरकार की तरकश लगभग खाली हो चुकी है। फिर भी, बढ़ती महंगाई और करेंसी वैल्यू को देखते हुए अगर टैक्स छूट की सीमा और बढ़ाई जाती है, तो इसे बहुत बड़ा जोखिम नहीं माना जाएगा, क्योंकि यह पैसा खपत के रूप में वापस अर्थव्यवस्था में ही आता है।

बजट को एक व्यापक नजरिए से देखें तो यह सिर्फ घोषणाओं का दस्तावेज नहीं होता, बल्कि पूरे साल की आर्थिक रूपरेखा होती है। यह एक ऐसा फिस्कल प्लान है जिसमें पहले खर्चे तय किए जाते हैं और फिर उनके मुकाबले रेवेन्यू की योजना बनाई जाती है। यानी सरकार यह तो जरूर बताएगी कि उसे कहां-कहां खर्च करना है और उस खर्च के लिए संसाधन कैसे जुटाए जाएंगे। इस लिहाज से बाजार को दिशा देने वाले संकेत बजट में जरूर मिलेंगे।

वित्त मंत्री के एक पुराने बयान की भी चर्चा है, जिसमें उन्होंने कस्टम ड्यूटी से जुड़े सुधारों की ओर इशारा किया था। बाकी ज्यादातर क्षेत्रों में सुधार हो चुके हैं, ऐसे में संभव है कि इस बार कस्टम से जुड़े बदलावों पर फोकस किया जाए। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि ये सुधार किस रूप में होंगे और किन सेक्टर्स पर असर डालेंगे। फिलहाल अनुमान लगाने से ज्यादा इंतजार करना ही समझदारी है।

कुल मिलाकर, इस बार बजट से पहले की तेजी बहुत तेज या व्यापक नहीं दिख रही। बाजार शायद किसी बड़े सपने के साथ नहीं, बल्कि सीमित उम्मीदों के साथ बजट की ओर बढ़ रहा है। असली तस्वीर 1 तारीख को ही साफ होगी, जब लाल पोथी खुलेगी और यह समझ आएगा कि इस बार खाते में क्या आया है और क्या नहीं।


(शेयर मंथन, 01 जनवरी 2026)

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