बेस मेटल की कीमतों में सीमित दायरे में कारोबार करने की संभावना - एसएमसी
बेस मेटल की कीमतों के नरमी के रुझान के साथ सीमित कारोबार करने की संभावना हैं।
बेस मेटल की कीमतों के नरमी के रुझान के साथ सीमित कारोबार करने की संभावना हैं।
सर्राफा की कीमतों में नरमी का रुझान रहने की संभावना है। सोने की कीमतों में 51,680 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 50,700 रुपये तक गिरावट हो सकती है जबकि चांदी की कीमतों में 68,990 रुपये के स्तर पर अड़चन के साथ 66,890 रुपये तक गिरावट हो सकती है।
कॉटन वायदा (अक्टूबर) की कीमतों में 17,300 रुपये तक गिरावट होने की संभावना है।
सोयाबीन वायदा (अक्टूबर) की कीमतों के 3,750-3,850 रुपये के दायरे में सीमित कारोबार करने की उम्मीद है।
हल्दी वायदा (अक्टूबर) में 5,920-5,950 रुपये तक शॉर्ट कवरिंग हो सकती है।
मंगलवार की गिरावट के बाद बुधवार को अमेरिकी शेयर बाजार के महत्वपूर्ण सूचकांकों में तेजी देखी गयी।
बुधवार को दिन भर भारतीय शेयर बाजार के दिग्गज सूचकांकों में कमजोरी का रुझान रहा।
कच्चे तेल की कीमतों के नरमी के रुझान के साथ सीमित दायरे में कारोबार करने की संभावना हैं और कीमतों को 3,140 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 2,940 रुपये के स्तर पर सहारा रह सकता है।
बेस मेटल की कीमतों के नरमी के रुझान के साथ सीमित दायरे में कारोबार करने की संभावना हैं।
सर्राफा की कीमतों में नरमी का रुझान रहने की संभावना है। सोने की कीमतों में 51,480 रुपये के स्तर पर अड़चन के साथ 50,670 रुपये तक गिरावट हो सकती है जबकि चांदी की कीमतों में 69,020 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 67,400 रुपये तक गिरावट हो सकती है।
कॉटन वायदा (अक्टूबर) की कीमतों के 17,520-17,680 रुपये के दायरे में सीमित कारोबार करने की संभावना है।
सोयाबीन वायदा (अक्टूबर) की कीमतों के नरमी के रुझान के साथ 3,800-3,850 रुपये के दायरे में कारोबार करने की उम्मीद है।
हल्दी वायदा (अक्टूबर) की कीमतों में 5,900 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 5,750-5,700 रुपये तक गिरावट हो सकती है।
हैप्पिएस्ट माइन्ड्स टेक्नालॉजीज (Happiest Minds Technologies) के आईपीओ (IPO) इश्यू के पहले दिन खुदरा निवेशकों ने इसका जोरदार स्वागत किया।
नये कारोबारी हफ्ते के पहले दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार के अहम सूचकांकों में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया।
बेस मेटल की कीमतों के एक दायरे में कारोबार करने की संभावना हैं क्योंकि डॉलर के कमजोर होने, एलएमई में भंडार में गिरावट और प्रमुऽ देशों में मैनुफैक्चरिंग गतिविधियों में रिकवरी होने से कीमतों को मदद मिल सकती है, जबकि आपूर्ति सामान्य होने और भू-राजनीतिक तनाव के साथ धातुओं के उत्पादन में रिकवरी से काउंटर पर दबाव रह सकता है।