शेयर मंथन में खोजें

धनिया में रुकावट, हल्दी की कीमतों में गिरावट का रुझान - एसएमसी

हल्दी वायदा (जून) की कीमतों के गिरावट के रुझान के साथ 7,800-8,000 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है। घरेलू बाजारों में कमजोर माँग के कारण निजामाबाद में हाजिर कीमतों में गिरावट के कारण सेंटीमेंट कमजोर है।

बेंचमार्क बाजार निजामाबाद में बल्ब वैरायटी के हल्दी की कीमतें 6,000-7,300 रुपये प्रति 100 किलोग्राम और फिंगर वैरायटी की कीमतें 6,600-7,000 रुपये प्रति 100 किलोग्राम के दायरे में रही। बाजार सूत्रों के मुताबिक खरीदार नयी खरीदारी को लेकर सतर्क हैं। खुदरा मांग के लिए कोई बड़ी चिंता नहीं है लेकिन औद्योगिक माँग बहुत कमजोर है। होटल, रेस्तरां और अन्य भोजनालय बंद हैं। जब यह सेक्टर खुलेगा तो माँग बढ़ेगी। बाजार में लॉकडाउन खत्म होने का इंतजार है।
जीरा वायदा (जून) की कीमतों के 13,700-13,900 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है। उपभोक्ता केंद्रों की ओर माँग सुस्त है क्योंकि अधिकांश राज्यों में कोविड-19 संबंधित लॉकडाउन और प्रतिबंध लगाये गये हैं। गुजरात में जीरा के ऊंझा बाजार में कोविड-19 मामलों में वृद्धि को नियंत्रित करने के प्रयास के तहत वैकल्पिक दिनों में नीलामी आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।
धनिया वायदा (जून) की कीमतों को 7,100-7,150 रुपये के करीब रुकावट का सामना करना पड़ सकता है और उच्च स्तरों से कुछ मुनाफा वसूली देखने को मिल सकती है। वर्तमान परिदृश्य में, दक्षिण की मिलों की ओर से माँग का अभाव है। साथ ही राजस्थान और मध्य प्रदेश की मंडियों से दिल्ली की मसाला मिलों की खरीद में गिरावट हुई है। कारोबारियों का कहना है कि अगर इस तरह से बिकवाली हावी रही तो जनू के पहले हफ्ते तक सुस्ती बनी रह सकती है। इस बीच, रामगजं कृषि उपज मंडी समिति ने बाजार यार्ड में कोविड-19 मामलों में वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए वकैल्पिक दिनों में धनिया की नीलामी करने का निणर्य लिया है। राजस्थान में लाकॅडाउन की पाबंदियाँ 8 जनू तक बढा़ दी गयी है। (शेयर मंथन, 31 मई 2021)

 

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख