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भारतीय बाजार में बनी रह सकती है अस्थिरता, स्टॉक विशेष रहेगी हलचल : सिद्धार्थ खेमका, मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विस

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (Motilal Oswal Financial Services Ltd) में रीटेल रिसर्च प्रमुख सिद्धार्थ खेमका के मुताबिक वैश्विक बाजारों में कमजोरी और आज से लागू हो रहे नये अमेरिकी टैरिफ की वजह से बढ़ते व्यापार तनाव पर बढ़ती चिंताओं की वजह से निफ्टी 137 अंकों की गिरावट के साथ 22399 (0.6%) के स्तर पर बंद हुआ। 

आरबीआई ने लगातार दूसरी बार प्रमुख रेपो दरों में 25 आधार अंकों कटौती की है, जिससे ये घटकर 6% (अनुमान के मुताबिक) पर आ गयी है। साथ ही नीतिगत रुख में बदलाव कर से उदार किया है, जो ब्याज दर को कम रखते हुए या अर्थव्यवस्था में तरलता डालकर आर्थिक विकास को मजबूती देने के दृष्टिकोण का संकेत देता है। 

इसने वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की जीडीपी वृद्धि के अनुमान को 6.7% से कम कर 6.5% कर दिया है, जिसने बाजार धारणा में सतर्कता बढ़ाई है। निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 में क्रमश: 0.5% और 0.9% की गिरावट के व्यापक बाजार में बिकवाली का दबाव देखने को मिला। 

क्षेत्रीय स्तर पर, अमेरिकी नैस्डैक फ्यूचर्स का अनुसरण करते हुए निफ्टी आईटी सूचकांक 2% से ज्यादा टूट गया। टेक्नोलॉजी क्षेत्र केंद्र में बना रहेगा, क्योंकि कल टीसीएस अपने चौथी तिमाही के नतीजों की घोषणा करेगा। हमारा अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आईटी आय धीमी रहने के अनुमान के साथ मार्गदर्शन सतर्क रहेगा। 

अमेरिकी राष्टपति ट्रंप द्वारा फार्मास्यूटिकल निर्यात पर भारी टैरिफ लगाने की अपनी योजना दोहराने के बाद फार्मा सूचकांक में तकरीबन 2% का नुकसान रहा। निफ्टी धातु सूचकांक 1.5% टूट गया, जब ट्रंप ने चीन पर अतिरिक्त 50% टैरिफ लगाने की घोषणा की, जिससे चीन पर प्रभावी टैरिफ दर बढ़कर 104% हो गयी है। 

आरबीआई द्वारा सोने के बदले ऋण के लिए व्यापक दिशानिर्देश जारी करने की योजना बताने के बाद सोने के वित्तपोषण में शामिल एनबीएफसी के शेयर दबाव में रहे। बाजार में गिरावट के बावजूद एफएमसीजी, टिकाऊ उपभोक्ता सामान और ऑटो सूचकांक ने लचीलापन प्रदर्शित किया, जिसका एक कारण स्काईमेट (एक प्रमुख निजी मौसम पूर्वानुमानकर्ता) द्वारा सामान्य मानसून का पूर्वानुमान करना है। 

रियल्टी और ऑटो स्टॉक केंद्र में रह सकते हैं, क्योंकि ऋण की लागत घटने से आवास और ऑटो क्षेत्र में माँग को समर्थन मिलेगा। कुल मिलाकर, अमेरिका से टैरिफ के मुद्दे पर स्पष्टता मिलने तक भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की उम्मीद है, जबकि तिमाही आय का मौसम शुरू होने के साथ स्टॉक/क्षेत्र विशेष में हलचल बढ़ सकती है।  

(शेयर मंथन, 09 अप्रैल 2025) 

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