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आईटी सेक्टर में बड़ी गिरावट के बाद भी क्यों नहीं बन रहा निवेश का भरोसा?

आईटी सेक्टर इस समय बाजार का सबसे कमजोर पक्ष बना हुआ है। हाल के महीनों में इसमें काफी तेज गिरावट देखने को मिली है। ऐसे में निवेशकों के मन में यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या अब आईटी शेयर इतने सस्ते हो गए हैं कि खरीदे जाएं या फिर अभी भी इसमें जोखिम ज्यादा है।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार इस सवाल के जवाब में कहते हैं कि ट्रंप टैरिफ से जुड़े दिनों में इसमें थोड़ी तेजी जरूर आई थी, लेकिन उसके बाद गैप डाउन के साथ जोरदार गिरावट शुरू हो गई और यह दबाव आगे भी बना रहा। आईटी सेक्टर को लेकर सबसे बड़ी चिंता एआई और ऑटोमेशन को लेकर है। यह सच है कि एआई भविष्य में आईटी सर्विस कंपनियों के बिजनेस मॉडल को काफी हद तक बदल सकता है। 100 फीसदी काम एआई से होगा, ऐसा शायद न हो, लेकिन इतना जरूर होगा कि कंपनियों को पहले के मुकाबले बहुत कम हेडकाउंट की जरूरत पड़ेगी। या तो आईटी सर्विस कंपनियां खुद अपने एआई-बेस्ड मॉडल तैयार करके कम लोगों के साथ ज्यादा काम करेंगी, या फिर ऑटोमेशन के कारण उनका पारंपरिक बिजनेस मॉडल दबाव में आ सकता है। इसी वजह से भारत में जीसीसी (ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स) का ट्रेंड भी तेजी से बढ़ता दिख रहा है। इन बदलावों के चलते आईटी सेक्टर को लेकर फिलहाल तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है और इसे अभी “ब्लाइंड इन्वेस्टमेंट ग्रेड” कहना मुश्किल है। 

ऐसे अनिश्चित माहौल में वैल्यूएशन सबसे बड़ा सहारा बनता है। माना जा रहा है कि अगर लार्ज कैप आईटी कंपनियों में करीब 10-15 फीसदी और करेक्शन आता है और मिडकैप आईटी शेयरों में लगभग 25 फीसदी तक की गिरावट होती है, तो वैल्यूएशन काफी हद तक एडजस्ट हो जाएगा। टेक्निकल लेवल्स के हिसाब से निफ्टी आईटी इंडेक्स में पहला सपोर्ट करीब 35,000 के आसपास और दूसरा मजबूत सपोर्ट 33,500 के पास माना जा रहा है। अगर यहां तक गिरावट आती है, तो लार्ज कैप आईटी शेयरों के वैल्यूएशन अपेक्षाकृत रीजनेबल माने जा सकते हैं, बशर्ते कंपनियों की ग्रोथ पूरी तरह से कमजोर न पड़े।

फिलहाल यह अनुमान यही है कि निफ्टी आईटी इंडेक्स में 10 से 15 फीसदी तक का करेक्शन वैल्यूएशन सपोर्ट ले आएगा। अगर इससे ज्यादा गिरावट होती है, तो कहानी पूरी तरह बदल सकती है और फिर 32,000–31,000 जैसे निचले स्तर भी देखने को मिल सकते हैं। एआई और एंथ्रोपिक जैसी टेक्नोलॉजी का असर बाजार को धीरे-धीरे समझ में आ रहा है, लेकिन आईटी कंपनियों को इन बदलावों की भनक पहले से रहती है और वे अपने बिजनेस मॉडल में उसके हिसाब से एडजस्टमेंट कर रही होती हैं।


(शेयर मंथन, 09 फरवरी 2026)

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